कोटा। कोटा-रामगंजमंडी स्थित रोड पर बनी दरा की नाल में रविवार को भी घंटों तक जाम लगा रहा। इस जाम में फंसने से एक एक मरीज की मौत का मामला भी सामने आया है। परिजनों ने मरीज की मौत के लिए जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया है।
रामगंजमंडी निवासी मुस्तकीम ने बताया कि सुबह उसके छोटे भाई अमीन के सीने में अचानक तेज दर्द हुआ। वह अमीन को तुरंत रामगंजमंडी अस्पताल ले गए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद हार्ट अटैक की आशंका जताते हुए डॉक्टरों ने अमीन को कोटा के लिए रैफर कर दिया। अमीन के इलाज के लिए वह तुरंत ही एंबुलेंस से कोटा के लिए रवाना हो गए।
जाम में फंसे
मुस्तकीम ने बताया कि लेकिन दरा की नाम में उन्हें लंबा जाम मिला। पूछने पर लोगों ने बताया कि यहां घंटों से ऐसे ही जाम लगा है। घंटों जाम में फंसे रहने के बाद बड़ी मुश्किल से लोग यहां से निकल पा रहे हैं। मुस्तकीम ने बताया कि इसके बाद उन्होंने भी जाम से निकलने के प्रयास शुरु कर दिए। लेकिन एंबुलेंस होने के बाद भी उन्हें जाम से निकलने में करीब दो घंटे लग गए। यहां तलवंडी स्थित निजी अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच कर अमीन को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने कहा कि थोड़ा और पहले आते तो संभव है मरीज की जान बच जाती
पहले भी हो चुके हैं हादसें
मुस्तकीम ने बताया कि जाम में फंसने से मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। कई मामलों का तो पता ही नही चलता। मुस्तकीम ने इस समस्या के लिए जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया है। जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति में कमी के कारण ही इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सौंदर्यीकरण और अन्य कामों पर करोड़ों रुपए खर्च करने वाले जनप्रतिनिधियों से मौके पर आने-जाने का अलग-अलग रास्ता नहीं बनाया जा रहा है।
मुस्तकीम ने कहा कि लौटते समय तक भी दरा की नाम में जाम लगा हुआ था। इसके चलते वह लौटने में भी लेट हो गए। जनप्रतिनिधि की लापरवाही के चलते बच्चों के सिर से पिता का साया उठा गया। पत्नी बे सहारा हो गई।
आए दिन लगता है जाम
उल्लेखनीय है कि दार की नाल में एक ही रास्ता होने से यहां आए दिन जाम के हालात रहते हैं। कभी कभी तो कई घंटों के लिए लंबा जाम लग जाता है। शनिवार को भी यहां 16 घंटे का जाम लगा था। जाम लगने से बड़ी संख्या में लोगों के जरुरी काम छूट जाते हैं। अब मौत के मामले भी सामने आने लगे हैं।