रेलवे अवैध वेंडरों का 10 लाख का चढ़ावा, कोरोना काल में भी जिम्मेदारों को नहीं यात्रियों की परवाह

रेलवे अवैध वेंडरों का 10 लाख का चढ़ावा, कोरोना काल में भी जिम्मेदारों को नहीं यात्रियों की परवाह

रेलवे अवैध वेंडरों का 10 लाख का चढ़ावा, कोरोना काल में भी जिम्मेदारों को नहीं यात्रियों की परवाह
कोटा। न्यूज़. ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ ही कोटा रेल मंडल में अवैध वेंडरों की भरमार हो गई है। बिना रोक-टोक चलने के लिए यह वेंडर जिम्मेदारों को हर महीने दस लाख रुपए से ज्यादा का चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। लगातार शिकायतें मिलने के बाद संवाददाता ने खुद मौके पर पहुंचकर जायजा लिया तो हालात काफी गंभीर, चौंकानेवाले और बेहत चिंताजनक नजर आए।
शुक्रवार को कोटा से बयाना तक बांद्रा-बरौनी अवध एक्सप्रेस और रविवार को बरौनी-बांद्रा अवध ट्रेन में बयाना से कोटा तक ट्रेनों में बड़ी संख्या में अवैध वेंडर पूड़ी- सब्जी, पानी की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक, चाय, दही, लस्सी, छाछ, पेठा, नमकीन, मूंगफली, सलाद, चना मसाला, पापड, प्रतिबंधित पान मसाला गुटखा, मोबाइल एसेसरीज, गुब्बारे, ताला-चाबी तथा बैग की चैन आदि सामग्री बेचते नजर आए। वातानुकूल कोचो तक में यह वेंडर सामान बेचते दिखे।
सवाई माधोपुर में चढ़ रहा खाना
जांच के दौरान सवाई माधोपुर में भी खाना चढ़ता है नजर आया। यात्रियों ने बताया कि सवाई माधोपुर में लंबे समय से अवैध रूप से ट्रेनों में खाना चढ़ाया जा रहा है। ट्रेन में यह खाना यात्रियों को मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है। वेंडर एक अंडा बिरयानी के यात्रियों से 100 रुपए तक वसूल रहे हैं।
नकली किन्नर भी आए नजर
ट्रेन में कई जगह नकली किन्नर भी नजर आए। एक जगह यात्रियों ने सलवार कुर्ता पहनकर किन्नर बने एक युवक को पकड़ भी लिया था। लेकिन बाद में यह युवक भाग खड़ा हुआ। इसके अलावा ट्रेन में कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ भीख मांगते भी नजर आईं। इसके अलावा भी कई महिला यात्रियों से पैसे मांगती दिखाई दीं। सफाई के नाम पर भी कुछ लोग यात्रियों से पैसे मांग रहे थे। हालांकि चलती ट्रेन में सफाई के लिए ठेका कर्मचारी तैनात थे। यह सभी लोग यात्रियों को हाथ लगा लगा कर पैसा मांग रहे थे।
हर महीने 10 लाख का चढ़ावा
सूत्रों ने बताया कि यह सब यूं ही नहीं होता। स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग के लिए जिम्मेदारों को चढ़ावा चढ़ाना जरूरी होता है। सीजन में यह चढ़ावा हर महीने 10 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।
सूत्रों ने बताया कि इसमें सबसे ज्यादा ढाई लाख रुपए कोटा में भेंट किए जाते हैं। इसके बाद भरतपुर 2 लाख, सवाई माधोपुर और गंगापुर डेढ़-डेढ़ लाख, बयाना 75 हजार तथा शामगढ़ और रामगंज मंडी आदि स्टेशनों पर यह चढ़ावा डेढ लाख रुपए तक होता है।
अधिकारी की क्या मजबूरी
वेंडरों ने बताया कि वह मजबूरी में यह काम करते हैं। घर चलाने के लिए उनके पास इसके सिवा कोई दूसरा काम-धंधा नहीं है। इस काम में भी अधिकतर वेंडर बमुश्किल दो वक्त की रोटी कमा पाते हैं। वेंडरों ने बताया कि लेकिन अधिकारियों की ऐसी क्या मजबूरी है जो वह अवैध वेंडर चलवाते हैं। जबकि अधिकारियों का वेतन ही हर महीने लाखों रुपए होता है। इस मामले में सबसे बड़े दोषी अधिकारी हैं जो सब कुछ होने के बाद भी लालच में यह सब करवा रहे हैं।
नहीं रोकते जिम्मेदार
उल्लेखनीय है कि प्लेटफार्म पर और ट्रेनों में टीटीई और आरपीएफ की ड्यूटी रहती है। लेकिन कोई भी इन वेंडरों को रोकना जरूरी नहीं समझता। यह वेंडर इन्हीं के सामने आराम से अपना सामान बेचते रहते हैं। न टीटीई इनसे जुर्माना वसूलते हैं और ना ही आरपीएफ इन्हें रोकने की कोशिश करती है।
कोरोना काल में गंभीर स्थिति
यात्रियों ने बताया कि कोरोना का काल में यह स्थिति बहुत गंभीर है। एक तो रेलवे पहले ही बिना टिकट यात्रियों को स्टेशन पर प्रवेश दे रही है। फिर इनसे जुर्माना वसूल कर नियम विरुद्ध यात्रा करा रही है। इससे ट्रेनों में पहले से ही यात्रियों की बहुत भीड़ रहती है। इसके बाद इन अवैध वेंडरों के कारण कोचों की बहुत गंभीर हो जाती है। एक तरफ रेलवे कोरोना नियमों की पालना का लगातार प्रचार विस्तार कर रही है दूसरी तरफ खुद ही इस की धज्जियां उड़ा रही है।
अधिकारियों नहीं दिया जवाब
इस संबंध में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अजय पाल को फोन किया गया। लेकिन अजय पाल ने हमेशा की तरह जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
 
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