रेलवे ने टीटीई के सिर फोड़ा अपनी गलती का ठीकरा, किया निलंबित

रेलवे ने टीटीई के सिर फोड़ा अपनी गलती का ठीकरा, किया निलंबित

रेलवे ने टीटीई के सिर फोड़ा अपनी गलती का ठीकरा, किया निलंबित
कोटा। न्यूज. रेलवे द्वारा अपनी गलती का ठीकरा टीटीई के सिर फोड़ने का मामला सामने आया है। बिना सीट के यात्री को कंफर्म आरक्षण देने के मामले में रेलवे में टीटीई को निलंबित कर दिया है। जबकि इस मामले में न तो टीटीई की कोई गलती सामने आई है और ना ही कोई शिकायत है। लेकिन अपनी खाल बचाने के लिए अधिकारियों ने टीटीई को बलि का बकरा बना दिया।
मामले में ऑल इंडिया विकलांग एसोसिएशन ने प्रशासन के इस निर्णय को पूरी तरह गलत बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन और संरक्षक भागीरथ शर्मा ने कहा कि इस मामले में टीटीई की कोई गलती नहीं है। टीटीई ने तो यात्री को सीट देने की पूरी कोशिश की। लेकिन यात्री को आवंटित सीट कोच में थी ही नहीं। ऐसे में टीटीई द्वारा यात्री को सीट उपलब्ध कराना संभव ही नहीं था।
मुकेश ने कहा की अपनी गलती छुपाने के लिए रेलवे ने टीटीई को निलंबित कर दिया। मुकेश में कहा बेहतर होता कि स्टाफ को दोषी ठहराने की जगह अधिकारी अपनी गलती मान कर व्यवस्था में सुधार के प्रयास करते। ताकि भविष्य में यात्रियों को परेशानी नहीं होना पड़ता।
मुकेश ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब कंफर्म आरक्षण होने के बाद भी यात्रियों को सीट नहीं मिली हो। कुछ दिन पहले कोटा-निजामुद्दीन जनशताब्दी ट्रेन में भी यही समस्या सामने आई थी। कोच में सीट नहीं होने के बाद भी यात्री का आरक्षण कर दिया गया था। इससे कुछ दिन पहले भी कोटा-नागदा ट्रेन में यह समस्या सामने आ चुकी है। इसमें भी सीट नहीं होने के बावजूद यात्री को आरक्षण दे दिया गया था।
लगातार मामले सामने आने के बावजूद भी व्यवस्था में सुधार के ठोस उपायों की जगह अधिकारी अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल कर कर्मचारियों को दोषी ठहरा रहे हैं।
टीटीइयों का निलंबन समस्या का समाधान नहीं
भागीरथ ने कहा कि टीटीइयों का निलंबन इस समस्या का समाधान नहीं है। अधिकारी यह हरकत अपनी गलतियां छुपाने के लिए कर रहे हैं। भागीरथ ने कहा कि अगर टीटीइयों का निलंबन व्यवस्था में सुधार की गारंटी है तो इससे पहले सामने आए जनशताब्दी और कोटा-नागदा ट्रेन के मामलों में टीटीइयों को सस्पेंड क्यों नहीं किया।
भागीरथ ने कहा कि जनशताब्दी में तो रोजाना 108 सीटें बिकती रहीं। जिम्मेदारों ने रेलवे को लाखों रुपए का चूना लगा दिया। रेलवे बोर्ड विजिलेंस और मजिस्ट्रेट तक ने कार्रवाई कर ली। लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा किसी टीटीई के निलंबन की बात सामने नहीं आई है।
टीटीई को ठहराया दोषी
भागीरथ ने बताया कि रेलवे ने मामले में टीटीई को दोषी ठहराया है। रेलवे ने अपनी सफाई में बताया कि आरक्षण के दो चार्ट जारी किए गए थे। यात्री की सीट दूसरे कोच में थी। टीटीई ने यात्री को इसकी जानकारी नहीं दी। भागीरथ ने बताया कि टीटीई के पास कोई दूसरा चार्ट नहीं था। कोच और सीट बदलने का कोई मैसेज भी यात्री के पास नहीं आया था। रेलवे को मामले की जानकारी ही शिकायत के बाद मिली है। ऐसे में दूसरे चार्ट का प्रश्न ही नहीं उठता। भागीरथ ने बताया कि अपनी गलती छुपाने के लिए अधिकारी झूठ बोल रहे हैं।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि कोटा में संभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रशासनिक पद पर तैनात दिव्यांग सत्यनारायण नरवरिया का 22 सितंबर को कोटा-इंदौर ट्रेन में छबडा स्टेशन तक कंफर्म आरक्षण था। सत्यनारायण को डी-5 कोच में 107 नंबर की सीट आवंटित थी। लेकिन यात्रा के दिन काफी तलाश के बाद सत्यनारायण को यह सीट कोच में नहीं मिली। कोच में सिर्फ 106 नंबर तक ही सीट थी। सत्यनारायण ने बताया कि सीट की तलाश में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। दिव्यांग होने के बावजूद भी उन्हें खड़े रहकर सफर करना पड़ा था। काफी देर खड़े रहने के कारण बीपी तक हाई हो गया था। बाद में भागीरथ ने उन्हें अपनी सीट उपलब्ध करवाई थी।
डीआरएम को दिया था ज्ञापन
भागीरथ ने बताया कि एसोसिएशन द्वारा मामले की शिकायत तुरंत रेलवे को की गई थी। गुरुवार को डीआरएम को भी एक ज्ञापन दिया गया था। इसके बाद इस मामले को रेल मंत्री और पश्चिम-मध्य रेलवे महाप्रबंधक को भी ट्वीट किया गया था। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने आनन-फानन में टीटीई धनजी मीणा को अगले ही दिन निलंबित कर दिया।

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