पहले भी विवादों में आ चुका है महिला संगठन, रेल मंत्री लगा चुके हैं रोक

पहले भी विवादों में आ चुका है महिला संगठन, रेल मंत्री लगा चुके हैं रोक

पहले भी विवादों में आ चुका है महिला संगठन, रेल मंत्री लगा चुके हैं रोक

कोटा। पश्चिम-मध्य रेलवे अधिकारियों की पत्नियों का बनाया महिला कल्याण संगठन (डब्लूडब्लूओ) पहले भी कई बार विवादों में आ चुका है। लेकिन इसकी गतिविधियों पर अब तक रोक नहीं लग सकी है।
तत्कालीन कोटा मंडल रेल प्रबंधक अर्चना जोशी पर तब के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अनिल गुप्ता ने डब्लूडब्लूओ के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था। अर्चना जोशी ने इन आरोपों से इनकार भी नहीं किया था। अर्चना ने कहा था कि डब्लूडब्लूओ के लिए पैसे मांगना गलत नहीं है। सभी अधिकारियों द्वारा इसमें हमेशा से कंट्रीब्यूट्स किया जाता रहा है। उल्लेखनीय है कि महिला होने के नाते तब अर्चना जोशी इस संगठन की कोटा मंडल अध्यक्ष थीं।
रेल मंत्री ने लगा दी थी रोक
यह मामला सामने आने के बाद तब रेल मंत्री ने कुछ समय के लिए संगठन की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। लेकिन बाद में संगठन की गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं।

रेलवे कैंटीन पर किया कब्जा
उल्लेखनीय है कि संगठन ने मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय की स्टाफ कैंटीन पर भी कब्जा कर रखा है। संगठन ने कैंटीन को नया रूप देकर पश्चिम-मध्य रेलवे महाप्रबंधक से इसका उद्घाटन कराया था।
रेलवे की कैंटीन हथियाने पर तब विभिन्न रेल कर्मचारी संगठनों ने डब्लूडब्लूओ का जोरदार विरोध किया था।
कैंटीन के उद्घाटन के समय भी कर्मचारी संगठनों ने जीएम के सामने भी हल्ला करते हुए डब्ल्यूडब्ल्यूओ की रेलवे में दखल अंदाजी बंद करने की मांग की थी। लेकिन मामला अधिकारियों की पत्नी का जुड़ा होने के कारण इसमें अभी तक कुछ नहीं हो सका है।

डीआरएम ऑफिस में खुलवाया चेंबर
ताजा मामला कोटा मंडल रेल प्रबंधक पंकज शर्मा के समय सामने आया है। एक कदम आगे बढ़ते हुए पंकज शर्मा ने डब्ल्यूडब्ल्यूओ अध्यक्ष होने के नाते अपनी पत्नी के लिए डीआरएम कार्यालय में एक चैंबर तक खुलवा दिया। सर्व सुविधा युक्त इस चेंबर के बाहर अधिकारियों की तरह बाकायदा डब्ल्यूडब्ल्यूओ अध्यक्ष और सचिव की नेम प्लेट तक लगवा दी। खुद डीआरएम ने अपनी पत्नी के साथ इस चेंबर का उद्घाटन किया था। यह खबर सामने आते ही मामले ने तूल पकड़ लिया था। बात पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय तक पहुंच गई थी। इसके बाद से इस चेंबर का उपयोग अभी तक नहीं हो सका है।

अब 30 लाख उगाई से चर्चा में
अब वर्तमान में कर्मचारियों के वेतन से करीब 30 लाख रुपए उगाई के चलते यह संगठन फिर से चर्चा में आ गया है। मामले में खास बात यह है कि इस उपाय के लिए रेलवे ने कर्मचारियों से सहमति तक लेना जरूरी नहीं समझा। हालांकि इसके लिए रेलवे द्वारा लेटर जरूर निकाला गया था। मात्र 4 दिन का समय देने के कारण यह लेटर कर्मचारियों तक पहुंचा ही नहीं। संगठन ने यह उगाई पश्चिम मध्य रेलवे जोन में कार्यरत करीब 50 हजार कर्मचारियों के वेतन से 50-50 रुपए काटकर की है। इसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन से पांच हजार तथा कनिष्ठ के दो हजार रुपए काटे गए हैं। बिना पूछे की गई इस अनावश्यक कटौती से अधिकारी और कर्मचारियों में रोष है। लेकिन उच्चाधिकारियों के गुस्से का शिकार होने से बचने के लिए कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

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