345 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग पर 41 करोड़ रुपये की फर्जी आई.टी.सी.का मामला
जयपुर, 24 मार्च। मुख्य आयुक्त श्री अभिषेक भगोतिया के निर्देशन मेंस्टेट जीएसटी की एन्टी ईवेजन राजस्थान द्वितीय ने एक बडी कार्यवाही करते हुए लगभग 345 करोडरुपये के फर्जी बोगस बिलों पर 41 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी (आगत कर)का मामला उजागर किया है।
विशेष आयुक्त एन्टी ईवेजन श्री शक्ति सिंह राठौड ने बताया कि एन्टी ईवेजन राजस्थान द्वितीय केसयुंक्त आयुक्त श्री कैलाश चन्द मीणा को फर्म मैसर्स कमल ट्रेडिंग, जीएसटी नं0-के संबंध में जानकारी मिली थी। श्री मीणा द्वारा सहायक आयुक्त श्री धर्मवीर चौधरी एवं राज्य कर अधिकारी श्री विष्णु कुमार, श्रीमति हर्षिका जैन की टीम गठित की गयी। ये टीम फर्म के पंजीयन प्रमाण पत्र में घोषित व्यवसाय स्थल पर जॉच करने पहुुंची।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान अधिकारियों को यह पता चला कि फर्म के प्रोपराईटर श्री कमल मनोहरलाल माखीजा, निवासी -सेवाकुंज धर्मशाला, पुरानी आगरा रोड, पंचवई, नासिक, महाराष्ट्र ने घोषित व्यवसाय स्थल के बिजली के बिल में कर चोरी की मंशा हेतु कूटरचित दस्तावेज तैयार कर स्वयं का नाम लिखकर पंजीयन प्राप्त किया है, जबकि व्यवसाय स्थल के मकान मालिक से प्राप्त बिजली के बिल में मकान मालिक श्रीमति मुन्नी देवी का स्वयं का नाम ही अंकित है।
व्यवहारी फर्म मैसर्स कमल ट्रेडिंग द्वारा बिना किसी खरीद के बोगस बिलों की खरीद को जीएसटीआर 3बी में दिखाया गया है। फर्म के पंजीयन प्रमाण पत्र में घोषित व्यवसाय स्थल मकान न. 2020, पितलियों का चौक, जौहरी बाजार, जयपुर पर जाकर व्यवसाय स्थल के मालिक श्रीमति मुन्नी देवी से पूछताछ की गयी तो उन्होंने बताया कि यह स्थल उन्हाेंने पिछले साल किराये पर दिया था व किरायेदार ने यहॉं पर लगभग 2-3 दिन काम किया और उसके बाद वह गायब है और किराया भी नहीं दिया है।
श्रीमति मुन्नी देवी ने बताया कि उन्हें फर्म के मालिक के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नहीं है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि व्यवहारी द्वारा कूटरचित दस्तावेज-बिजली का बिल के आधार पर पंजीयन प्राप्त करना पाया गया। विभाग द्वारा आगत कर को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
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