प्रदेश के 7 जिलों के 19 सेंटर्स पर किया गया कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन

प्रदेश के 7 जिलों के 19 सेंटर्स पर किया गया कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन

प्रदेश के 7 जिलों के 19 सेंटर्स पर किया गया कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन
जयपुर, 2 जनवरी। प्रदेश के 7 जिलों के 19 सेंटर्स पर शनिवार कोरोना वैक्सीनेशन का ड्राई रन (मॉक ड्रिल) किया गया। इन सभी सेंटर्स पर वैक्सीनेशन के पश्चात होने वाले संभावित सामान्य प्रतिकूल प्रभावों एवं कोविड प्रोटोकॉल नियमित रूप से फोलो करने के बारे में जानकारी दी गई। शनिवार को चयनित सेंटर्स पर कुल 424 लाभार्थियों पर ड्राई रन किया गया।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि पहले चरण में प्रदेश के 7 जिलों में पूरी सावधानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के साथ ड्राई रन की शुरुआत की गई। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश भर में ड्राई रन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर के जेके लोन अस्पताल में सबसे पहले ड्राई रन की शुरुआत की गई।
चिकित्सा सचिव श्री सिद्धार्थ महाजन और सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुधीर भंडारी ने ड्राई रन पर पूरी निगरानी रखी। स्थानीय स्तर पर जिला चिकित्सा व संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में ड्राई रन किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जयपुर में जेके लोन अस्पताल के साथ ही बनीपार्क सेटेलाइट अस्पताल, अचरोल प्राथमिक चिकित्सा केंद्र व मणिपाल अस्पताल में ड्राइ रन किया गया। इसके अलावा बीकानेर, जोधपुर, भरतपुर, करौली, अजमेर के 2-2 व जयपुर और बांसवाड़ा के 4-4 सेंटर्स पर ड्राई रन करवाया गया। प्रदेश में कुल 19 सेंटर्स पर ड्राई रन किया गया।
यूं हुई ड्राई रन की प्रेक्टिस
डॉ. शर्मा ने बताया कि ड्राई रन में सबसे पहले लाभार्थी के लिए टीकाकरण कक्ष व निगरानी कक्ष का मॉडल तैयार कर कोविड वैक्सीन लगाने का रिहर्सल किया गया। इस दौरान लाभार्थी के पहचान दस्तावेजों का वैक्सीनेशन आफिसर द्वारा सत्यापन कर प्रवेश दिया गया। मोबाइल में कोविन साफ्टवेयर पर लाभार्थी को प्रमाणित कर वैक्सीनेशन के लिए टीकाकरण कक्ष में भेजा गया, जहां वैक्सीनेटर ऑफिसर द्वारा टीकाकरण की प्रक्रिया (डेमो) को पूर्ण किया गया और कोविन सॉफ्टवेयर में लाभार्थी के टीके लगाये जाने की एन्ट्री की गई।
उन्होंने बताया कि लाभार्थी को 30 मिनिट के लिए निगरानी कक्ष में वैक्सीनेशन आफिसर के द्वारा निगरानी में रखा गया। इस ड्राई रन की प्रक्रिया के दौरान एक लाभार्थी को टीका लगाने में लगने वाले समय एवं कोविन सॉफ्टवेयर में एन्ट्री करने में लगे समय का आकलन व साफ्टवेयर के संचालन की प्रक्रिया को जांचा गया।

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