शिक्षा विभाग ने दी जिम्मेदारी: 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए सीडीईओ से लेकर अध्यापक तक की जिम्मेदारी तय
शिक्षा कैप्सूल तैयार किए गए हैं, इससे नियमित अध्ययन के साथ ही बच्चों की कमजोरी दूर की जाएगी….
बीकानेर।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय राजस्थान बीकानेर की ओर से अब प्रदेश में प्रयास 2021 के माध्यम से परीक्षा परिणाम काे सुधारने की कवायद शुरू की है। जिले के 615 से अधिक सरकारी स्कूलों के बच्चों पर फोकस किया जाएगा। कमजोर छात्र-छात्राओं को सिर्फ बोर्ड की परीक्षा में पास करने के साथ ही तृतीय और द्वितीय श्रेणी लाने वाले बच्चों काे प्रथम श्रेणी तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। निदेशालय ने सीडीईओ, डीईओ, सीबीईओ से लेकर पीईईओ तक की जिम्मेदारी तय कर दी है।
इसके अलावा सभी शिक्षा अधिकारियों काे ब्लॉक का आवंटन करते हुए उन्हें मॉनिटरिंग इंचार्ज बनाया है। कक्षा 10वीं और 12वीं में अध्ययनरत बच्चों के शैक्षणिक उन्नयन पर काम किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा कैप्सूल तैयार किए गए हैं। इससे अब नियमित अध्ययन के साथ ही बच्चों की कमजोरी काे पकड़ते हुए दूर करने पर काम किया जाएगा।
परीक्षा से एक माह पहले पाठयक्रम पूरा करने का लक्ष्य
बोर्ड परीक्षाएं मई माह के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित हैं। इसलिए आधा माह फरवरी, मार्च और अप्रैल तक कुल ढाई महीने का समय बचा है। विभाग की ओर से इस समयावधि के अनुरूप पाठ्यक्रम पूर्ण करने की योजना बनाई जाएगी। इसमें परिस्थितियों को देखते हुए 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा करवाया जाएगा। विद्यालय स्तर पर ऑनलाइन पढ़ाई, स्माइल-2 व ई-कक्षा के माध्यमों के सहयोग से बोर्ड परीक्षाओं का पाठ्यक्रम परीक्षा से एक माह पूर्व पूरा करवाना है। इसके लिए समस्त मॉडल पेपर व मॉडल उत्तर पुस्तिकाएं विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। निदेशालय ने बोर्ड में न्यून परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलों का चयन किया है। इसमें वे स्कूल या बच्चों काे शामिल किया है, जहां हर साल बच्चे फेल हाेते हैं या जहां पर परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत से कम है। जहां बच्चों के फेल हाेने का प्रतिशत ज्यादा है, ऐसे स्कूलों काे अब बाॅटम लाइन स्कूल कहा है। वहीं जाे हर साल 36 से 50 प्रतिशत प्राप्तांक प्राप्त करते हैं। उन्हें आगे कही भी वरीयता नहीं मिलती है।
90% वाले विद्यार्थियों को मेरिट के लिए प्रेरित करेंगे
बीकानेर निदेशालय से प्रयास 2021 की गाइडलाइन के आधार पर काम शुरू कर दिया है। प्रत्येक विषयाध्यापक, व्याख्याता, प्रधानाचार्य और सीबीईओ इसमें योगदान देते हुए बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। तृतीय, द्वितीय व प्रथम श्रेणी वाले संभावित विद्यार्थियों को क्रमश: उच्चतम श्रेणी की ओर व 90 प्रतिशत वाले विद्यार्थियों को मेरिट की दिशा में कदम बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
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