स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाने के लिए डिग्रीधारी कला शिक्षक ही नियुक्त हों

स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाने के लिए डिग्रीधारी कला शिक्षक ही नियुक्त हों

स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाने के लिए डिग्रीधारी कला शिक्षक ही नियुक्त हों

  • मुख्य सचिव

जयपुर, 16 दिसम्बर। मुख्य सचिव श्री निरंजन आर्य ने कहा कि फाइन एवं कॉमर्शियल आर्ट्स के विषय पढ़ाने के लिए विजुअल आर्ट के डिग्रीधारी कला शिक्षकों की ही नियुक्ति की जानी चाहिये। उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स को उच्च शिक्षा के अधीन रहने देने अथवा कला संस्कृति के अधीन संचालित किये जाने के संबंध में गुणावगुण के आधार पर शीघ्र निर्णय करने हेतु प्रकरण उच्च स्तर पर रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान में रिक्त पदों को भरने के लिए भी शीघ्र कार्यवाही की जाएगी।

मुख्य सचिव ने बुधवार को राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स के संबंध में आयोजित बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एतिहासिक संस्थान है और राज्य सरकार की मंशा है कि इसके विकास पर विशेष रूप से ध्यान देकर इसे और समृद्ध बनाया जाए। उन्होंने कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग की तरह ही यह भी एक अलग तरह का क्षेत्र है, जिसके लिए विशेष नियम बनाए जाने चाहिये।

बैठक में कला एवं संस्कृति विभाग की शासन सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने कहा कि कला संस्थान को केवल नियम- कायदों के आधार पर विकसित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए कला की भावना को जीवंत रखते हुए प्रोफेशनल एटिट्यूड के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कला शिक्षा एक अलग कैडर होना चाहिये और राजस्थान लोक सेवा आयोग से कला के शिक्षकों की भर्ती विशेष नियमों के तहत की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि इनकी भर्ती के लिए अलग से पात्रता मापदण्ड तय किये जाने चाहिये।

बैठक में वी.सी के माध्यम से उच्च शिक्षा शासन सचिव श्रीमती शुचि शर्मा ने कहा कि संस्थान में प्रोफेशनल कोर्स पढ़ाने के लिए नियमों के तहत ही नियुक्तियां की जाती हैं। उन्होंने आर्ट स्कूल के तहत चल रहे प्रोफेशनल कोर्सेज व ऑनलाइन कोर्सेज के बारे में तथा संसाधनों की स्थिति के संबंध में मुख्य सचिव को जानकारी दी।

बैठक में कलाविद् श्री विद्यासागर उपाध्याय तथा श्री समंदर सिंह खंगारोत ने भी वीसी के माध्यम से मुख्य सचिव को राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स को पुनः कला एवं संस्कृति विभाग के अधीन ही संचालित कराए जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पहले यह संस्थान कला एवं संस्कृति विभाग के ही अधीन था, जिसे वर्ष 2006 में पूरी तरह उच्च शिक्षा के अधीन कर दिया गया। उन्होंने कहा कि न केवल शिक्षक बल्कि प्राचार्य भी फाइन आर्ट्स से ही होना चाहिये। उन्होंने आग्रह किया कि संस्थान में स्थाई शिक्षक लगाए जाने चाहिये तथा फेकल्टी और संसाधनों का अभाव नहीं होना चाहिये।

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