कृषि विभाग का राजसाथी पोर्टल रखेगा सभी योजनाओं का लेखा-जोखा – कृषि मंत्री

कृषि विभाग का राजसाथी पोर्टल रखेगा सभी योजनाओं का लेखा-जोखा – कृषि मंत्री

कृषि विभाग का राजसाथी पोर्टल रखेगा सभी योजनाओं का लेखा-जोखा
– कृषि मंत्री
जयपुर, 17 मार्च। कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि कृषि विभाग की ओर से कृषकों को देय अनुदान का लेखा-जोखा रखने एवं सभी योजनाओं की पारदर्शिता के लिए राजसाथी पोर्टल बनाया गया है।
श्री कटारिया ने प्रश्नकाल में विधायक श्रीमती इंद्रा के पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तिलहन, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिली-जुली योजना है। इसी में तारबंदी का कार्य किया जाता है। योजना को प्रभावी और किसान हित में बनाने के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि कृषक अपने खेत की जमाबंदी, नक्शा प्रिंट, बैंक खाते की पासबुक आदि की प्रति आवेदन के साथ लगाकर ऑनलाइन पत्रावली ई-मित्र के जरिये अपलोड कर सकता है। ऑनलाइन आवेदन पर ही प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाती है। फिर मौके स्थल पर कार्य के बाद सत्यापन कर संबंधित लाभार्थी को भुगतान किया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में विधानसभा बामनवास में 25 कृषकों को 4696 मीटर के लिए 4 लाख 69 हजार रुपये का वित्तीय अनुदान देकर लाभान्वित किया गया है।
श्री कटारिया ने बाताया कि विभाग को सौलर पंप के 173 आवेदन ई-मित्र के जरिये प्राप्त हुए। सभी की 2020-21 में प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। इसमें 138 कृषकों द्वारा कृषक हिस्सा राशि जमा कराने के बाद कृषक सहमति के अनुसार आपूर्तिकर्ता फर्म कंपनियों को कार्यादेश नोटिस जारी किये गये है। कंपनियों द्वारा 51 कृषकों के सौलर पंप स्थापित कर दिये गये है।
इससे पहले विधायक श्रीमती इंद्रा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों को विभिन्न कृषि कायोर्ं एवं कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदाय दिया जाता है। अनुदान प्राप्ति के लिए कृषकों को वांछित दस्तावेजों सहित नजदीकी ई-मित्र कियोस्क अथवा मोबाइल, कम्प्यूटर के माध्यम से ऑनलाईन आवेदन करना होता है। पात्र कृषकों को विभागीय लक्ष्यानुसार ऑनलाईन वरीयता के क्रम में लाभान्वित करते हुए अनुदान राशि को सीधे ही उनके बैंक खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से जमा किया जाता है। साथ ही जिन योजनाओं में ऑनलाईन आवेदन अनिवार्य नहीं है, उनमें विभागीय दिशा-निर्देशानुसार आवेदन करना होता है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र बामनवास में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 42 कृषकों की कृषि यंत्रों की पत्रावलियां बजट अभाव में अनुदान भुगतान हेतु लंबित रही हैं। इन पत्रावलियों के निस्तारण के लिए बजट आवंटित किया जा चुका है। अनुदान भुगतान के लिए बिल कोष कार्यालय भिजवाये जा चुके हैं।

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