संशोधित……कई वर्षों से किराए की जमीन पर संचालित रोडवेज बस स्टैंड को शीघ्र हीअपनी जमीन की जागी उम्मीद

संशोधित……कई वर्षों से किराए की जमीन पर संचालित रोडवेज बस स्टैंड को शीघ्र हीअपनी जमीन की जागी उम्मीद

संशोधित……कई वर्षों से किराए की जमीन पर संचालित रोडवेज बस स्टैंड को शीघ्र हीअपनी जमीन की जागी उम्मीद

डिबस्या के पास खसरा नंबर 1146 सरकारी जमीन चयनित की गई,लेकिन आवंटन की एवज में करीब 20 लाख रुपए जमा होना बाकी-गंगापुर सिटी
कई वर्षों से किराए की जमीन पर संचालित रोडवेज बस स्टैंड को शीघ्र ही अपनी जमीन मिल सकती है। सवाईमाधोपुर जि़ले के सबसे वड़े उपखंड मुख्यालय पर स्थित रोडवेज बस स्टैंड पर फिलहाल में यात्री सुविधाओं की बहुत कमी है स्वयं की जमीन पर बस स्टैंड संचालन होने पर सुविधाओं में इजाफा हो सकेगा।बस स्टैंड के लिए डिबस्या के पास खसरा नंबर 1146 सरकारी जमीन चयनित की गई है। लेकिन इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से रोडवेज प्रशासन से जमीन आवंटन की एवज में करीब 20 लाख रुपए की मांग की जा रही है। लेकिन कोरोना के चलते रोडवेज प्रशासन पहले ही घाटे में चल रहा है ऐसी स्थिति में यह बड़ी राशि सरकारी कोष में जमा कराना मुमकिन नहीं है इस संबंध में मुख्य प्रबंधक ने कलेक्टर को पत्र भेजकर जमीन सरकारी अनुदान पर दिलाने की मांग की है।साथ ही स्थानीय विधायक रामकेश मीना यदि अपने कोष से जमीन आवंटन करा दे तो शहर वासियों को नए साल में खुद के बस स्टैंड की सौगात मिल सकेगी।
मुख्य प्रबंधक ने इस संबंध में विधायक रामकेश मीना से अपने विधायक कोष से 20 लाख रुपए की राशि देने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। उम्मीद है कि यदि विधायक अपने कोष से 20 लाख रुपए जमीन के लिए हरी झंडी देते है तो आने वाले नई साल में रोडवेज बस स्टैण्ड के लिए जमीन मिल जाएगी। और नया बस स्टैण्ड बन सकता है। जिससे यात्रियों को जन सुविधाओं मिल सकती है।
अभी बस स्टैण्ड 1992 से किराए की जमीन पर संचालित है
उपखण्ड मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैण्ड के लिए राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम प्रशासन दो दशक में एक भूमि की तलाश नहीं कर पा रहा है। इसके चलते रोडवेज बस स्टैण्ड दो दशक से किराए की भूमि पर संचालित हो रहा है। रोडवेज ने यह बस स्टैण्ड 1992 से किराए की जमीन पर संचालित कर रखा है। वर्तमान में इसका किराया करीब 12 हजार रुपए प्रतिमाह है। पिछले 24 साल में निगम लाखों रुपए किराए का भुगतान कर चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि रोडवेज अधिकारी रुचि दिखाते तो किराए के रूप में खर्च की गई राशि से नया बस स्टैण्ड विकसित हो जाता।
पहले जमीन हुई आबंटित पर बताया अनुपयुक्त:
परिवहन निगम प्रबंधन को 1985 में डिबस्या रोड पर बस स्टैण्ड के लिए दस बीघा जमीन आबंटित हुई थी लेकिन वर्ष 2006 में हिण्डौन आगार के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक एस.के. अरोड़ा ने भूमि को अनुपयुक्त बताते हुए वापस सरकार को दे दी। अब कई साल से नए बस स्टैण्ड के लिए जगह तलाश की जा रही है लेकिन अभी तक नया बस स्टैण्ड नहीं बन पाया है।
प्रतिदिन सात हजार से अधिक भार
रोडवेज स्टैण्ड से दिनभर में करीब सात हजार यात्री बसों में सफर करते हंै। रोडवेज द्वारा यहां से करीब 70 बसों को संचालन किया जाता है। इससे एक माह में करीब 24 लाख रुपए की राजस्व प्राप्ति होती है। इसके बावजूद यात्रियों को सुविधा नहीं मुहैया हो रही है। यात्री धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। उन्हें शौचालय नहीं होने पर वे इधर-उधर ताकना पड़ता है।
सुविधा नहीं होने से पांच किलोमीटर खड़ी करते रोडवेज को यहां रोडवेज बस स्टैण्ड पर सुविधाओं की कमी के चलते बाहर से यहां रोडवेज स्टैण्ड पर आते बस चालको को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्योकि बस स्टैण्ड पर ना तो शौचालय की व्यवस्था है। ना ही पानी पीने की। इसके अलावा बैठने के लिए एक छोटा सा टीन लगा हुआ है। जहां गंदगी जमा रहती है।कुछ यात्री टीन के पास पाटोर में बैठकर गाडिय़ों का इन्तजार करते है। सुविधाओं के अभाव में रोडवेज के चालक व परिचालक अपनी गाड़ी को रात्री के समय पांच किलो मीटर दूर ले जाना पड़ता है। सुबह वह नहाकर स्टैण्ड पर डयूटी पर आना पड़ता है। जिससे रोडवेज को हजार रुपए का डीजल जलने से नुकसान हो रहा है।
बसें बाहर खड़ी रहती हैं
जगह के अभाव में कई बार तो रोडवेज बसें बस स्टैण्ड के अन्दर न खड़ी होकर सड़क पर खड़ी रहती है। इससे आने-जाने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो जाम जैसी स्थित हो जाती है। जिससे न्यायालय में तारीख पेशी पर जाने वाले अधिवक्ताओं एवं मोकिलो को परेशानी उठनी पड़ती है।इनका कहना
बस स्टैंड के लिए डिबस्या के पास खसरा नंबर 1146 सरकारी जमीन चयनित की गई है। लेकिन इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से रोडवेज प्रशासन से जमीन आवंटन की एवज में करीब 20 लाख रुपए जमा कराने के लिए कहा गया है। लेकिन इस समय रोडवेज की हालत खराब होने के कारण गंगापुर सिटी के विधायक रामकेश मीना को अपने कोटे के कोष से राशि देने के लिए कहा है।
विष्णु कुमार वर्मा,मुख्य प्रबंधक, हिडौन आगार।

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