खनिज तेल से दो वर्षाें में प्रदेश को 7 हजार 203 करोड 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त-खान मंत्री

खनिज तेल से दो वर्षाें में प्रदेश को 7 हजार 203 करोड 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त-खान मंत्री

खनिज तेल से दो वर्षाें में प्रदेश को 7 हजार 203 करोड 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त-खान मंत्री
जयपुर, 15 मार्च। खान मंत्री श्री प्रमोद जैन भाया ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि गत दो वर्षों में खनिज तेल से प्रदेश को 7 हजार 203 करोड 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ तथा वर्ष 2020-21 में फरवरी तक 1 हजार 653 करोड 85 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है।
श्री भाया प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत खनिज से प्राप्त राजस्व में पेट्रोलियम, गैस संबंधी राजस्व को केन्द्रीय सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि लेड तथा जिंक को 1956 की उद्योग नीति में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया था। वर्ष 1993 में जिंक लेड सहित 13 खनिजों को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया। उन्हाेंने बताया कि उत्पादन के आधार पर राजस्व आय कम या अधिक होती रहती है।
इससे पहले विधायक श्री रफीक खान के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में श्री भाया ने बताया कि  राज्य सरकार को प्रधान एवं अप्रधान खनिजों से खनिज राजस्व के रूप में आय प्राप्त होती है। विगत दो वषोर्ं में, प्रधान खनिज से वर्ष 2018-19 में 3221.98 करोड व वर्ष 2019-2020 में 2595.53 करोड तथा अप्रधान खनिज से वर्ष 2018-19 में 1953.41 करोड व वर्ष 2019-20 में 1837.69 करोड, इस प्रकार वर्ष 2018-19 में कुल खनिज आय 5175.39 करोड व वर्ष 2019-20 में 4433.22 करोड रही। उन्होंने इन्हीं दो वर्ष में प्रधान व अप्रधान खनिजों से प्राप्त खनिजवार आय का विवरण सदन के पटल पर रखा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में एल्युमिनियम (बॉक्साईट) के भण्डार बारां व उदयपुर जिले में तथा लेड-जिंक के भण्डार उदयपुर, राजसमन्द, भीलवाडा, अजमेर, सिरोही, सवाई माधोपुर एवं चित्तौडगढ जिले में है। उन्होंने इन खनिजों के भण्डार की मात्र सहित विवरण तथा इन भण्डारों के आवंटन सम्बन्धी विवरण सदन के पटल पर रखा।
खान मंत्री ने बताया कि प्रधान खनिजों के अन्वेषण व खनन में निवेश को बढावा देने हेतु लेड व जिंक सहित अन्य प्रधान खनिज जो वर्ष 1993 से पूर्व अन्वेषण व खनन हेतु सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे, को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज नीति, 1993 में निजी क्षेत्र हेतु खोल दिया गया। उन्होंने बताया कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की प्रथम अनूसूची के भाग-स में उल्लेखित खनिज लेड एवं जिंक की खनिज रियायतें इस अधिनियम की धारा 5(1) के प्रावधान अनुसार भारतीय नागरिक अथवा कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के अनुच्छेद (20) के अन्तर्गत परिभाषित कम्पनी को आवंटित की जा सकती है।

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