रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने लिया बड़ा फैसला, बेरोजगारों ने सरकार के फैसले का किया विरोध
जयपुर | सरकारी विद्यालयों, कॉलेजों में रिक्त शिक्षकों के पदों की वजह से नियमित स्टूडेंट्स की पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होने की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘विधा सम्बल योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इसके सम्बन्ध में राजस्थान वित्त विभाग की ओर से नए नियम जारी किए गए हैं, ताकि इन संस्थानों में अध्यापन व्यवस्था को सुचारू बनाने की व्यवस्था की जा सके।
आपकों बता देते हैं कि विद्या सम्बल योजना के तहत जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी शिक्षकों की नियुक्ति कर सकेंगी। शिक्षकों की ये नियुक्तियां अस्थाई तौर पर होगी। इन शिक्षकों से 14 बिंदुओं पर शपथ पत्र लिया जाएगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि कई बार अस्थाई शिक्षकों की ओर से स्थायी नियुक्ति का दावा किया जाता है, इसलिए इस विवाद से बचने के लिए इन शिक्षकों से नियुक्ति से पहले 14 बिंदुओं का एक शपथ पत्र लिया जाएगा। आपकों यह महत्वपूर्ण जानकारी भी दे देते हैं कि सरकारी विद्यालयों व कॉलेजों में स्थायी शिक्षक नियुक्त होते ही इन अस्थाई शिक्षकों को इनके पद से हटा दिया जाएगा।
अब आपकों इन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में समझाते हैं। नया सत्र शुरू होने से पहले सभी राजकीय विद्यालयों एवं कॉलेजों को मुख्यालय को रिक्त पदों की सूचना भेजनी होगी। आपकों बता देते हैं कि रिक्त पदों की संख्या के आधार पर ही अभ्यर्थियों से आवेदन लिए जाएंगे। इन अभ्यर्थियों के शैक्षिक अंको के आधार पर मेरिट सूची जिलों में गठित जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया में नए अभ्यर्थियों के साथ सेवानिवृत्त कार्मिकों को भी मौका दिया जाएगा। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में संस्था प्रधान सीधे ही अपने स्तर पर संस्था में रिक्त चल रहे पदों पर सम्बंधित सेवा नियमों में अंकित योग्यता आदि की पात्रता रखने वाले सेवानिवृत्त कार्मिक या निजी अभ्यर्थियों का परिपत्र में वर्णित दरों पर बजट की उपलब्धता की शर्त के अध्यधीन अस्थाई शिक्षक रख सकेंगे।
गेस्ट फेकल्टी हेतु मानदेय की दरें:
ग्रेड थर्ड टीचर हेतु अधिकतम ₹21000, ग्रेड द्वितीय हेतु ₹25000 जबकि ग्रेड फर्स्ट हेतु अधिकतम ₹30000 मासिक मानदेय होगा। अनुदेशक एवं प्रयोगशाला सहायक हेतु मानदेय ₹21000 होगा। सहायक आचार्य के लिए ₹45000, सह आचार्य के लिए ₹52000 और आचार्य के लिए ₹60000 अधिकतम मानदेय होगा। हालांकि राज्य सरकार के इस निर्णय का प्रदेशभर के बेरोजगारों ने विरोध किया है। बेरोजगारों का कहना है कि राज्य सरकार स्थायी भर्ती की बजाय संविदा के आधार पर कर्मचारियों से काम करवाना चाह रहीं हैं।
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