नई दिल्ली: आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती मनाई जा रही है। करिश्माई नेता, मजबूत प्रशासक और बेहतरीन वक्ता के रूप में पहचाने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व से जुड़े कई प्रेरणादायक पहलू हैं। उनकी गिनती उन नेताओं में होती है, जिन्होंने न केवल देश के विकास की दिशा तय की, बल्कि अपनी विनम्रता और समझदारी से विपक्ष तक को प्रभावित किया।
दिल्ली मेट्रो सेवा के उद्घाटन के साथ भी अटल बिहारी वाजपेयी की यादें गहराई से जुड़ी हुई हैं। आज 22 वर्षों बाद भी दिल्ली मेट्रो में उनकी पहली यात्रा और योगदान को लोग याद करते हैं।
24 दिसंबर 2002 को दिल्ली में पहली बार मेट्रो रेल सेवा का उद्घाटन किया गया। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में शाहदरा से तीस हजारी तक मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह 8.2 किलोमीटर लंबा पहला कॉरिडोर था, जिसमें 6 मेट्रो स्टेशन शामिल थे।
उद्घाटन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी न केवल मेट्रो सेवा को रवाना करने वाले पहले व्यक्ति बने, बल्कि वे मेट्रो के पहले यात्री भी थे। उन्होंने आम यात्री की तरह कश्मीरी गेट स्टेशन पर लाइन में लगकर मेट्रो कार्ड खरीदा और मेट्रो में यात्रा की। उनके इस कदम ने जनता के बीच एक बड़ा संदेश दिया कि वे आम लोगों के जीवन को समझते हैं।
उद्घाटन के मौके पर अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, "यह मेट्रो सेवा दिल्ली के लोगों का सपना था। यह लोगों की यात्रा को सुगम बनाएगी और उनके जीवन को आसान करेगी।"
जब 25 दिसंबर 2002 को यह मेट्रो सेवा आम लोगों के लिए खोली गई, तो बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें यात्रा की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कागज के टिकट भी जारी करने पड़े। इसके बावजूद मेट्रो सेवा ने जल्द ही दिल्ली के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनकर अपनी जगह बना ली।
22 वर्षों में दिल्ली मेट्रो ने अभूतपूर्व प्रगति की है। 8.2 किलोमीटर से शुरू हुई मेट्रो सेवा आज 392.44 किलोमीटर के नेटवर्क में बदल चुकी है, जिसमें 288 से अधिक स्टेशन शामिल हैं। दिल्ली मेट्रो ने दिल्ली-एनसीआर को जोड़ते हुए यात्रा को तेज, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया है।
वर्तमान में एरोसिटी से तुगलकाबाद तक मेट्रो कॉरिडोर के साथ-साथ अन्य परियोजनाओं पर काम हो रहा है। हाल ही में दिल्ली मेट्रो को हरियाणा के सोनीपत तक विस्तार देने की भी मंजूरी मिली है।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो का जो सपना शुरू हुआ था, वह आज एक साकार और विशाल नेटवर्क का रूप ले चुका है। यह उनकी दूरदृष्टि और विकास की सोच का प्रमाण है। उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए दिल्ली मेट्रो के इस योगदान को भी सम्मानित किया जाना चाहिए।
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