राजस्थान के करौली जिले के टोडाभीम थाना क्षेत्र में सोमवार को एक ऐसा रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ, जिसने पूरी कानून व्यवस्था और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोपुर गांव के समीप गंभीर नदी एनीकट के पास रास्ते पर पहले से टूटकर गिरे पड़े 11 केवी (11 KV) हाईटेंशन विद्युत लाइन के तार की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार एक ही परिवार के तीन दलित श्रमिकों की जिंदा जलने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। करंट इतना भयानक था कि पल भर में तीनों की जिंदगी खत्म हो गई और उनकी मोटरसाइकिल भी धू-धूकर जल उठी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतकों की पहचान टोडाभीम के आखावाड़ा गांव की जाटव बस्ती निवासी रामबाबू जाटव (45), चौबे जाटव (45) और विष्णु जाटव (22) के रूप में हुई है। ये तीनों हिण्डौनसिटी से मजदूरी का काम खत्म करके देर शाम मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने गांव वापस लौट रहे थे। भोपुर गांव के पास अंधेरे और अचानक सामने आए टूटे हुए हाईटेंशन तार के कारण वे संभल नहीं पाए और उसमें उलझ गए, जिससे यह भीषण हादसा घटित हुआ।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, हिण्डौन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सत्येंद्र पाल सिंह, टोडाभीम पुलिस उपाधीक्षक (DSP) मुरारी लाल मीणा और टोडाभीम उपखंड अधिकारी (SDM) अमन चौधरी भारी पुलिस जाब्ते के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया।
इस हृदयविदारक घटना पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया (X) पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लिखा:
"करौली जिले के टोडाभीम थाना क्षेत्र के 11 केवी के टूटे हुए तार में उलझ कर गिरने के बाद करंट की चपेट में आने से 3 लोगों के जिंदा जल जाने की खबर बेहद हृदयविदारक है। इस घटना की पूरी जांच की जानी चाहिए एवं जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी लापरवाही के कारण इन निर्दोष लोगों की जान गई। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।"
इस दर्दनाक हादसे के बाद बिजली विभाग (विद्युत निगम) के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लाइन टूटने के बावजूद विभाग ने समय रहते न तो बिजली काटी और न ही तार को ठीक किया।
हादसे के विरोध में विधायक घनश्याम महर के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण और पीड़ित परिवार के लोग शवों को मौके पर रख धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
सरकारी नौकरी: पीड़ित परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी मुहैया कराई जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: विद्युत निगम के जिन लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों की ढिलाई से यह लाइन टूटी पड़ी रही, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज की जाए।
समाचार लिखे जाने तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता का दौर जारी था, और इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
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