सिरोही। राजस्थान में फर्जी दिव्यांग (Handicap) सर्टिफिकेट बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सिरोही सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय में पिछले 6 साल के दौरान जारी किए गए 5,177 दिव्यांग सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए गए हैं। इस बड़े खुलासे के बाद चिकित्सा मंत्री ने मामले की जांच एसओजी (SOG) को सौंप दी है। आशंका है कि हजारों लोगों ने इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी और पेंशन लाभ प्राप्त कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाई है।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक पति ने अपनी ही पत्नी के फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर अनुचित तरीके से सरकारी योजना का लाभ लेने की शिकायत अधिकारियों से की। इस शिकायत पर जिला कलक्टर के आदेश पर वर्तमान सीएमएचओ डॉ. खराड़ी ने टीम गठित कर जांच करवाई, जिसमें सर्टिफिकेट संदिग्ध पाया गया।
इसके अलावा जोधपुर निवासी देवेन्द्र सिंह और आबूरोड निवासी ताराचंद ने भी तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में फर्जी सर्टिफिकेट बनाने की शिकायत की थी।
चिकित्सा विभाग की जांच में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार के कार्यकाल में जारी किए गए 5,177 दिव्यांग सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए गए हैं। फर्जीवाड़े के मुख्य संकेत निम्नलिखित हैं:
डिजिटल सिग्नेचर की क्लोनिंग: केन्द्र के पोर्टल पर पूर्व सीएमएचओ डॉ. सुशील परमार के डिजिटल सिग्नेचर से फाइलें अपलोड की गई हैं, जबकि वे उस अवधि में सिरोही में पदस्थ नहीं थे।
संदिग्ध चिकित्सक: चिकित्सक गिन्नी अग्रवाल के अलग-अलग विशेषज्ञ के रूप में कई प्रमाण पत्रों पर साइन हैं, जबकि इस नाम की कोई चिकित्सक जिले में नहीं बताई जा रही है।
आधार नंबर का दुरुपयोग: केन्द्र और राज्य के पोर्टल पर समान आधार नंबर से अलग-अलग साइन से फाइलें अपलोड हैं, जिससे डिजिटल क्लोनिंग का अंदेशा है।
सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया कि संदिग्ध महिला कर्मचारी को मेडिकल जांच के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई। अब फिर से नोटिस जारी किया गया है।
प्रदेश में पहले भी 43 संदिग्धों की जांच में 37 सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए थे, जो 9 सीएमएचओ द्वारा जारी किए गए थे। इनमें 17 थर्ड ग्रेड टीचर, 3 सैकंड ग्रेड टीचर, 4 सहायक प्राध्यापक सहित कई अन्य पदों के कर्मचारी शामिल थे।
अब सिरोही के इतने बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद एसओजी की जांच में यह पता चलेगा कि:
कितने लोगों ने इन फर्जी सर्टिफिकेट्स से सरकारी नौकरी हासिल की है।
कितने लोग पेंशन उठाकर सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सिरोही के अलावा, जयपुर, भरतपुर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, बांसवाड़ा और श्रीगंगानगर में भी इस तरह के संदिग्ध प्रमाण पत्र जारी किए जाने के मामले सामने आए हैं।
चिकित्सा मंत्री ने एसओजी को जांच के लिए लिखा है, और उम्मीद है कि जल्द ही इस बड़े घोटाले की सभी परतें खुलेंगी।
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