भरतपुर: भरतपुर में रविवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जो कुछ दिन पहले गंगापुर में हुए दुखद हादसे की याद दिला गया। यहां पर दो कि-मैन, जो रेलवे ट्रैक की मरम्मत का काम कर रहे थे, राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से चमत्कारिक रूप से बच गए। इस भयावह अनुभव के बाद दोनों कर्मचारी भगवान का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे हैं।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कि-मैन कमल प्रसाद और नवल सिंह अपनी नियमित ड्यूटी पर थे। वे भरतपुर से मथुरा की ओर अप लाइन पर रेल पटरियों की चाबियों को ठीक करते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान कमल की नजर एक फिश प्लेट के ढीले नट-बोल्ट पर पड़ी और वह उन्हें कसने में जुट गया। इस बीच, नवल चलते हुए कमल से कुछ दूरी आगे निकल गया।
सामने से आई मौत, साथी ने बचाई जान
तभी अचानक तेज रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम (12432) उसी ट्रैक पर आ पहुंची। सामने से तेजी से आती ट्रेन को देखकर नवल बुरी तरह घबरा गया और उसे ट्रैक से हटने तक का होश नहीं रहा।
पीछे काम कर रहे कमल की नजर भी उसी पल राजधानी एक्सप्रेस पर पड़ी। खतरे को भांपते ही कमल ने बिना एक क्षण गंवाए दौड़ लगाई और नवल को पकड़कर तेजी से पटरी के दूसरी ओर खींच लिया। उनके पटरी से हटते ही पलक झपकते राजधानी एक्सप्रेस वहां से गुज़र गई। पटरी से हटने में जरा सी भी देर होती तो दोनों निश्चित रूप से ट्रेन की चपेट में आ जाते और एक बड़ा हादसा हो जाता। घटना के तुरंत बाद राजधानी के लोको पायलट राजेंद्र शर्मा ने भरतपुर स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दी।
सदमे में डूबे रहे कर्मचारी
मौत को इतने करीब से देखकर लौटे दोनों कि-मैन काफी देर तक सदमे में रहे और सामान्य नहीं हो पाए। वे घटनास्थल पर ही काफी देर तक बैठे रहे और भगवान को धन्यवाद देते रहे। नवल की हालत सबसे ज्यादा खराब थी, जो बुरी तरह से बदहवास नजर आ रहा था।
हॉर्न की आवाज भी नहीं सुनाई दी
ट्रेन के चालकों ने बताया कि पटरी पर दोनों कर्मचारियों को देखकर उन्होंने लगातार हॉर्न बजाते हुए 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन को रोकने की भी कोशिश की थी। हालांकि, दोनों में से किसी भी कर्मचारी को हॉर्न की आवाज सुनाई नहीं दी।
अधिकारियों ने इस घटना का कारण बताते हुए कहा कि घटनास्थल पर रेल पटरियों में घुमाव है, जिसके चलते हॉर्न की सीधी आवाज वहां तक नहीं पहुंच पाती। इसके कारण ट्रेन भी अचानक ही दिखाई देती है।
यह घटना हाल ही में गंगापुर में हुए एक दुखद हादसे की याद दिलाती है, जहां पटरी पर काम कर रहे सिग्नल विभाग के दो कर्मचारियों - तकनीशियन गोवर्धन सैनी और हेल्पर दिनेश मीणा - की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। गंगापुर में भी रेल पटरियों में घुमाव होने के कारण चालकों को वे दूर से दिखाई नहीं दिए थे और जब तक वे दिखे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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