कोटा, 29 मई 2025: बुधवार शाम को कोटा के डकनिया तालाब स्टेशन के पास एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां चंडीगढ़-तिरुवनंतपुरम केरला संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12218) की चपेट में आने से 10 से 12 भैंसें कट गईं। इस घटना के कारण ट्रेन करीब सवा घंटे तक मौके पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना और राहत कार्य: यह घटना शाम करीब 7:20 बजे की है। पहले से ही लगभग 45 मिनट की देरी से चल रही यह ट्रेन शाम 7 बजे कोटा से रवाना हुई थी। भैंसों के ट्रेन की चपेट में आने के बाद, सूचना मिलते ही आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और ट्रैकमैन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने इंजन और कोचों में फंसे भैंसों के अवशेषों को हटाने का काम किया, जिसके बाद ट्रेन आगे की ओर रवाना हो सकी।
इस हादसे के कारण रेल यातायात बाधित हुआ। कोटा-घाटोली मेमू ट्रेन (ट्रेन नंबर 61614) भी डकनिया स्टेशन के पहले डेढ़ घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही, जिससे यात्रियों को इंतजार करना पड़ा।
रेलवे की फेंसिंग के दावों पर सवाल: यह घटना रेलवे के "मिशन रफ्तार" के तहत किए जा रहे फेंसिंग के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि कोटा रेल मंडल में पटरी के दोनों ओर फेंसिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिसका उद्देश्य आवारा पशुओं को पटरियों पर आने से रोकना है। लेकिन एक दर्जन भैंसों के कटने से यह दावा फेल होता दिख रहा है।
मंडल में अभी भी आए दिन ट्रेनों से आवारा पशु कटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फेंसिंग पूरी तरह प्रभावी नहीं है। सूत्रों ने बताया कि कई जगहों पर फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो गई है, कुछ जगहों पर रास्ते बन गए हैं, और कई स्थानों पर नालों की जगह पर फेंसिंग नहीं लगाई गई है। इसके चलते जानवर अभी भी आसानी से पटरी पर पहुंच रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये भैंसें भी किसी नाले के जरिए ही पटरी पर पहुंची होंगी।
यह घटना रेलवे सुरक्षा और अवारा पशुओं से होने वाले हादसों को रोकने की दिशा में और अधिक प्रभावी कदमों की आवश्यकता को उजागर करती है।
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