रणथंभौर में बनेगा नया सफारी पार्क: बाघों के कुनबे को मिलेगा नया आशियाना, पर्यटकों के लिए खुलेगा रोमांच का नया द्वार

रणथंभौर में बनेगा नया सफारी पार्क: बाघों के कुनबे को मिलेगा नया आशियाना, पर्यटकों के लिए खुलेगा रोमांच का नया द्वार

सवाई माधोपुर | विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और बढ़ते पर्यटन भार को देखते हुए वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग अब रणथंभौर के पास ही एक नया सफारी पार्क विकसित करने की तैयारी में है। इस पार्क के बनने से न केवल वृद्ध और घायल बाघों को सुरक्षित घर मिलेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी यह एक बेहतरीन वैकल्पिक गंतव्य साबित होगा।

IOC के बंद प्लांट पर नजर, 100 बीघा जमीन की मांग

प्रस्ताव के अनुसार, रणथंभौर से सटे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के वर्षों से बंद पड़े प्लांट की जमीन पर यह सफारी पार्क विकसित किया जाएगा।

  • मंत्री की पहल: कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने करीब तीन माह पूर्व पेट्रोलियम मंत्रालय को इस जमीन के हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा था।

  • प्राकृतिक जंगल: यह क्षेत्र पहले से ही आठ फीट ऊंची दीवार से घिरा है और सालों से बंद रहने के कारण यहाँ प्राकृतिक जंगल और वन्यजीवों के अनुकूल हैबिटेट विकसित हो चुका है।

बाघों की 'टेरिटोरियल फाइट' पर लगेगा अंकुश

वर्तमान में रणथंभौर में बाघों की संख्या 76 से अधिक हो चुकी है, जबकि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्टडी के अनुसार रिजर्व की क्षमता करीब 50 बाघों की है।

  • सुरक्षित एनक्लोजर: नए पार्क में बड़े एनक्लोजर (बाड़े) बनाए जाएंगे, जहाँ घायल और बुजुर्ग बाघों को रखा जा सकेगा। इससे मुख्य रिजर्व में युवा बाघों के बीच होने वाले आपसी संघर्ष (Territorial Fight) को कम किया जा सकेगा।

  • शिफ्टिंग: शुरुआत में यहाँ दो से तीन बाघों को ट्रेंकुलाइज कर शिफ्ट करने की योजना है। उन्हें रणथंभौर के वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल से मेडिकल सेवाएं दी जाएंगी।

पर्यटकों के लिए होगा 'फुल डे' सफारी का मजा

अभी रणथंभौर में सुबह और शाम की दो शिफ्ट में सीमित संख्या (144 वाहन) में ही सफारी होती है। लेकिन नए सफारी पार्क के नियम अलग होंगे:

  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक: नए पार्क में पर्यटक सुबह से शाम तक सफारी का आनंद ले सकेंगे।

  • वाहनों की संख्या: यहाँ प्रतिदिन करीब 200 वाहनों के संचालन की अनुमति मिल सकती है, जिससे उन पर्यटकों को राहत मिलेगी जिन्हें मुख्य रिजर्व में टिकट नहीं मिल पाता।

कॉरिडोर और ग्रासलैंड पर भी फोकस

वन विभाग बाघों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। साथ ही, रणथंभौर-कैलादेवी और रामगढ़ विषधारी कॉरिडोर को भी विकसित किया जा रहा है। शिकार की कमी न हो, इसके लिए विभाग ने 500-500 हेक्टेयर के ग्रासलैंड भी तैयार किए हैं।

अधिकारी का कथन: "इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। जल्द ही सफारी पार्क विकसित कर वृद्ध बाघ-बाघिनों को यहाँ रखा जाएगा, जिससे मुख्य रिजर्व पर दबाव कम होगा।" — मानस सिंह, उपवन संरक्षक, रणथंभौर


#Ranthambore #TigerReserve #NewSafariPark #WildlifeConservation #RajasthanTourism #TigerConservation #SawaiMadhopur #EcoTourism #ForestDepartment

G News Portal G News Portal
46 0

0 Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Leave a comment

Please Login to comment.

© G News Portal. All Rights Reserved.