भरतपुर। भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के डांग इलाके में सड़क निर्माण के लिए ग्रामीणों ने खुद पहल की है। उपखंड मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर स्थित 8 गांवों को जोड़ने वाली 12 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 12 करोड़ रुपए मंजूर किए थे, लेकिन वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया था।
ग्रामीणों की परेशानी:
बयाना के डांग इलाके के घुनैनी, ज्ञानी का बेड़ा से लेकर करौली जिले के नवलापुरा और डांडा गांव तक पक्की सड़क नहीं है। सड़क निर्माण नहीं होने से तंग आकर डांडा, नवलापुरा, गाजीपुर, कोलूपुरा समेत दस गांवों के लोगों ने हर घर से दो-दो सदस्यों की एक टीम बनाई है। ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर मौरम बिछाकर सड़क को चलने लायक बनाने का काम शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने में परेशानी होती है, कई बार रास्ते में ही प्रसव हो जाता है तथा युवाओं की शादियां भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रशासन की उदासीनता:
प्राप्त जानकारी अनुसार नवलापुरा महाकाल आश्रम के पीठाधीश्वर संत रुद्रनाथ महाकाल के आंदोलन के बाद दो साल पहले सड़क के लिए बजट मंजूर हुआ था, लेकिन वन विभाग की अनुमति न मिलने से काम अटका हुआ है। सरकार बदलने के बाद से तो निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लग गई है।
अधिकारियों का जवाब:
उक्त मामले में सार्वजनिक निर्माण विभाग के एक्सईएन बृजमोहन का कहना है कि यह सड़क दो जिलों की सीमा में आ रही है, जिसे विभाजित करने के लिए सरकार के पास मंजूरी के लिए प्रस्ताव बना कर भेजे गए थे। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही सड़क का निर्माण काम शुरू होगा तथा यह सड़क वन विभाग के जमीन में आ रही है। ऐसे में वन विभाग से भी मंजूरी मिलने का इंतजार है।
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