कोटा | आत्मनिर्भरता और कार्यकुशलता की मिसाल पेश करते हुए कोटा रेल मंडल के विद्युत विभाग (TRD डिपो) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग के कर्मचारियों ने महज तीन महीनों में तीन टावर वैगनों की जटिल तकनीकी खराबियों को खुद ही ठीक कर रेलवे के 53 लाख रुपए बचाए हैं। आमतौर पर इन भारी उपकरणों की मरम्मत के लिए महंगे बाहरी ठेके दिए जाते थे।
एक टावर वैगन का ट्रैक्शन अल्टरनेटर पूरी तरह खराब हो गया था। कंपनी से नया अल्टरनेटर मंगाने की लागत ₹30.03 लाख आ रही थी।
चुनौती: यह उपकरण इतना भारी होता है कि वैगन को बिना ऊपर उठाए (Up-lift) इसे निकालना असंभव माना जाता है।
समाधान: कोटा के कर्मचारियों ने सामूहिक प्रयास और तकनीकी सूझबूझ से वैगन को बिना अप-लिफ्ट किए अल्टरनेटर निकाला, उसकी मरम्मत की और उसे वापस फिट कर वैगन को चालू कर दिया।
दानापुर (पूर्वोत्तर रेलवे) से कोटा मंडल को एक बंद टावर वैगन मिली थी। इसके पार्किंग ब्रेक सिलेंडर खराब थे, जिसके कारण यांत्रिक विभाग इसे फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दे रहा था।
विफलता: दाहोद और टीकेडी (TKD) वर्कशॉप भी इस समस्या को हल नहीं कर पाए थे।
बचत: नए सिलेंडर बदलने का खर्च ₹22.46 लाख था, लेकिन डिपो के कर्मचारियों ने पुराने सिलेंडरों को ही रिपेयर कर वैगन को कार्यशील बना दिया।
एक अन्य वैगन के हाइड्रोलिक लिफ्टिंग प्लेटफॉर्म से तेल का रिसाव हो रहा था, जिससे ओएचई (OHE) मेंटेनेंस का काम बाधित हो रहा था।
पहले इस काम के लिए बाजार में ₹45,000 से ₹50,000 खर्च किए जाते थे, लेकिन इस बार कर्मचारियों ने इसे खुद ही ठीक कर दिया।
कोटा मंडल में वर्तमान में 23 टावर वैगन संचालित हैं। यह एक प्रकार का ब्रेकडाउन व्हीकल है, जिसका उपयोग रेलवे की ओवरहेड विद्युत लाइनों (OHE) के रखरखाव और आपातकालीन मरम्मत के लिए किया जाता है। ट्रेनों के निर्बाध संचालन के लिए इनका हर समय चालू हालत में रहना अनिवार्य है।
उपलब्धि: मंडल के अधिकारियों ने इस तकनीकी सफलता के लिए कर्मचारियों की पीठ थपथपाई है। इस प्रयास से न केवल पैसा बचा है, बल्कि संसाधनों की मरम्मत की आंतरिक क्षमता भी बढ़ी है।
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