रेल कर्मचारियों में आक्रोश: रेलवे मजदूर संघ ने श्रम कानूनों के खिलाफ मनाया 'काला दिवस'

रेल कर्मचारियों में आक्रोश: रेलवे मजदूर संघ ने श्रम कानूनों के खिलाफ मनाया 'काला दिवस'

कोटा। केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल से लागू किए गए नए श्रम कानूनों के विरोध में रेलवे मजदूर संघ ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को संघ के आह्वान पर कोटा मंडल में 'काला दिवस' मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में रेल कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

"मजदूर विरोधी हैं नई श्रम संहिताएं"

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मंडल सचिव अब्दुल खालिक ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्व में प्रचलित 23 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार नई श्रम संहिताओं (Labor Codes) में समाहित कर दिया है। खालिक के अनुसार, ये नए बदलाव पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं और कर्मचारियों व श्रमिकों के अधिकारों के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं।

काली पट्टी और मोमबत्तियों से जताया विरोध

मंडल की सभी शाखाओं पर हुए इस विरोध प्रदर्शन का स्वरूप काफी मुखर रहा:

  • ड्यूटी के दौरान विरोध: रेल कर्मचारियों ने काम के दौरान अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर सरकार के फैसले के प्रति अपना विरोध प्रकट किया।

  • नाइट शिफ्ट में प्रदर्शन: रात्रि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने मोमबत्तियां जलाकर सांकेतिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया और नए कानूनों को वापस लेने की मांग की।

  • नारेबाजी: मंडल की विभिन्न शाखाओं में कर्मचारियों ने "नए श्रम कानून वापस लो" जैसे नारों के साथ प्रदर्शन किया।


क्या है विवाद की मुख्य वजह?

रेलवे मजदूर संघ का मानना है कि पुराने कानूनों को खत्म कर जो नई संहिताएं बनाई गई हैं, वे श्रमिकों के हितों की रक्षा करने के बजाय उनके शोषण का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मजदूर विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


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