जयपुर | राजस्थान में रसोई गैस (LPG) की किल्लत की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान सामने आया है। गहलोत ने खाड़ी देशों (Middle East) में युद्ध के हालातों को देखते हुए देश में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई है। उन्होंने इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार को 'असंवेदनशील' बताते हुए आम जनता और राज्य सरकार से विशेष आग्रह किए हैं।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा:
"दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार इस संभावित राष्ट्रीय संकट को लेकर भी हमेशा की तरह लापरवाह बनी हुई है। समय रहते स्थिति का आकलन ना कर पाना केंद्र सरकार का स्पष्ट 'कलेक्टिव फेलियर' है।"
गहलोत ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हमें खुद भी सतर्क रहना होगा। उन्होंने नागरिकों से रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल का उपयोग पूरी जिम्मेदारी और मितव्ययता (कम खर्च) के साथ करने का आग्रह किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया:
श्रमिकों के ढाबे: उन्होंने मांग की कि दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूरों के लिए संचालित ढाबों में गैस की सप्लाई न रुके, क्योंकि गरीब तबका वहीं भोजन करता है।
अन्नपूर्णा रसोई (पूर्ववर्ती इंदिरा रसोई): गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार से विशेष आग्रह किया कि प्रदेश की अन्नपूर्णा रसोइयों में गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने तर्क दिया कि लाखों जरूरतमंद छात्र और श्रमिक पूरी तरह इन्हीं रसोइयों पर निर्भर हैं।
| निशाना | मुद्दा | सुझाव/अपील |
| केंद्र सरकार | नीतिगत विफलता और असंवेदनशीलता | समय रहते संकट का सही आकलन करें |
| राज्य सरकार | अन्नपूर्णा रसोई की व्यवस्था | गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो |
| आम जनता | ईंधन की किल्लत | गैस और डीजल-पेट्रोल की बचत करें |
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