जयपुर: राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) में बहुप्रतीक्षित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर चिकित्सकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विश्वविद्यालय ने 11 दिसंबर को भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की थी, जिसमें सुपर स्पेशिलिटी और जनरल मेडिसिन समेत विभिन्न विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 88 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
विभागवार पदों का विवरण
सुपर स्पेशिलिटी श्रेणी में कार्डियोलॉजी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी जैसे विभागों में 9 पद रखे गए हैं। वहीं, जनरल मेडिसिन, ENT, ऑप्थाल्मोलॉजी, एनेस्थिसिया, जनरल सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनी, रेडियोडायग्नोसिस, स्किन, टीबी एंड चेस्ट, एनाटोमी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, पैथोलॉजी, पीएमआर, पीएसएम (एपिडेमियोलॉजी और स्टेटिस्टिशियन), साइकेट्री, इमरजेंसी मेडिसिन और फैमिली मेडिसिन जैसे विभागों में 79 पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
आवेदन प्रक्रिया में देरी
विवि प्रशासन ने 28 दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का शेड्यूल जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय से 48 घंटे बाद भी आवेदन लिंक सक्रिय नहीं हुआ है। इस देरी के कारण चिकित्सक परेशान हैं और लगातार विवि प्रशासन से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं।
वेबसाइट पर सिर्फ एक संदेश
RUHS की आधिकारिक वेबसाइट पर केवल यह संदेश दिया गया है कि "जल्द ही लिंक उपलब्ध होगा। कृपया नजर बनाए रखें।" इससे आवेदन करने वाले चिकित्सक और अधिक चिंतित हो गए हैं, क्योंकि उन्हें न तो आवेदन प्रक्रिया की नई तारीख के बारे में बताया गया है और न ही देरी का कारण स्पष्ट किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक रोस्टर की मंजूरी का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, भर्ती के रोस्टर को लेकर उच्चस्तरीय मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या विवि प्रशासन ने बिना पूरी तैयारी के इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है? यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पिछले 10 वर्षों में विवादों के कारण RUHS में कोई भी नई फैकल्टी भर्ती नहीं हो पाई है।
चिकित्सकों में रोष
इस भर्ती प्रक्रिया की देरी ने चिकित्सा समुदाय में रोष पैदा कर दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि पहले ही मेडिकल फील्ड में स्टाफ की भारी कमी है और ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में देरी राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
RUHS को इस भर्ती प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और आवेदन लिंक जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। साथ ही, प्रशासन को पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि आवेदन करने वाले चिकित्सकों को असमंजस की स्थिति से बचाया जा सके।