कोटा। साइबर ठगों ने अब रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला तुगलकाबाद (TKD) विद्युत लोको शेड से सेवानिवृत्त एक रेलकर्मी के साथ सामने आया है, जहाँ ठगों ने पेंशन रुकने का झांसा देकर उनके खाते से 35 हजार रुपए पार कर दिए।
पीड़ित रेलकर्मी के पास एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को कोटा डीआरएम ऑफिस का सहायक मंडल कार्मिक अधिकारी (APO) मनोज सिंह बताया। ठग ने बेहद विश्वास के साथ कहा कि आपका 'जीवित प्रमाण पत्र' (Life Certificate) जमा नहीं हुआ है, जिससे पेंशन बंद हो सकती है।
ठग ने पीड़ित को डराते हुए समाधान बताया कि यदि वे HMIS पोर्टल पर मात्र 10 रुपए की ऑनलाइन फीस जमा कर देंगे, तो पेंशन जारी रहेगी। बातों के जाल में फंसाकर ठग ने फीस जमा करने के नाम पर गोपनीय जानकारी हासिल की और पलक झपकते ही रेलकर्मी के बैंक खाते से 35,000 रुपए निकाल लिए।
इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) सौरभ जैन ने स्पष्ट किया है कि:
रेलवे का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी फोन, SMS या व्हाट्सऐप पर कभी भी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी (OTP/Password) नहीं मांगता।
पेंशन अपडेट या केवाईसी के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल पूरी तरह धोखाधड़ी हैं।
आधिकारिक सूचनाएं केवल railnet.gov.in डोमेन वाले ई-मेल या लिखित पत्रों के माध्यम से ही दी जाती हैं।
"पेंशनर किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर बैंक डिटेल मांगे, तो वह ठग है।" — सौरभ जैन, Sr. DCM, कोटा मंडल
रेलवे के लेखा विभाग ने पेंशनर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है:
संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें: यदि कोई डीआरएम ऑफिस के नाम से कॉल करे, तो संबंधित कार्यालय जाकर पुष्टि करें।
जानकारी साझा न करें: अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक विवरण किसी को न बताएं।
तुरंत दें सूचना: यदि ठगी होती है, तो तुरंत साइबर सेल (1930), नजदीकी पुलिस स्टेशन या रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सूचित करें।
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