मजदूर संघ में 'खींची' युग की शुरुआत: महेंद्र सिंह ने संभाला अध्यक्ष पद, लेकिन अपनों की बेरुखी ने बढ़ाई चिंता

मजदूर संघ में 'खींची' युग की शुरुआत: महेंद्र सिंह ने संभाला अध्यक्ष पद, लेकिन अपनों की बेरुखी ने बढ़ाई चिंता

 

कोटा। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के गलियारों में सोमवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब महेंद्र सिंह खींची ने मंडल अध्यक्ष के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया। जहाँ एक ओर समर्थकों ने साफा बांधकर और फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया, वहीं संघ के एक प्रभावी गुट की गैरमौजूदगी ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को जगजाहिर कर दिया।

उम्मीदों पर फिरा पानी: आरसी मीणा और डीके शर्मा गुट नाराज

महेंद्र सिंह खींची के अध्यक्ष बनने से संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता नाखुश नजर आ रहे हैं। इस नाराजगी का केंद्र कार्यकारी अध्यक्ष आरसी मीणा और कोषाध्यक्ष डीके शर्मा माने जा रहे हैं।

  • शक्ति प्रदर्शन रहा बेअसर: चर्चा थी कि मीणा या शर्मा में से किसी एक को ही अध्यक्ष चुना जाएगा। दोनों ने इसके लिए भोपाल अधिवेशन में भारी शक्ति प्रदर्शन भी किया था।

  • समारोह से दूरी: ऐन वक्त पर बाजी पलटने से नाराज मीणा और शर्मा अपने समर्थकों सहित पदभार ग्रहण समारोह से नदारद रहे, जो संघ के भीतर भविष्य में होने वाले टकराव के संकेत दे रहा है।

वरिष्ठों का मिला आशीर्वाद: "निष्ठा और ईमानदारी का फल"

भले ही एक गुट नाराज हो, लेकिन संघ के पुराने दिग्गजों ने महेंद्र सिंह के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया है:

  • राकेश मित्तल (पूर्व मंडल सचिव): उन्होंने कहा कि 2009 से 2016 तक कार्यालय सचिव के रूप में महेंद्र की निष्ठा और ईमानदारी ने ही उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है।

  • जीपी यादव (पूर्व अध्यक्ष): उन्होंने महेंद्र के 'सबको साथ लेकर चलने' के गुण की प्रशंसा करते हुए उन्हें लंबी पारी खेलने का आशीर्वाद दिया।

  • एसडी धाकड़ (पूर्व अध्यक्ष/सचिव): उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्मचारियों की जरूरतों को समझने का महेंद्र का विशेष गुण संगठन को मजबूती देगा।

यूनियन और परिषद ने भी दी बधाई

महेंद्र सिंह खींची के पदभार ग्रहण करने पर न केवल संघ के पूर्व पदाधिकारियों, बल्कि विरोधी संगठनों के नेताओं ने भी खेल भावना दिखाई। एम्पलाई यूनियन के पदाधिकारी बीएन शर्मा और कर्मचारी परिषद के चंद्रभान मीणा ने भी उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।


चुनौतियां और भविष्य

पदभार ग्रहण करने के बाद महेंद्र सिंह खींची के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर उभरी इस दरार को भरना और नाराज गुट को एक साथ लेकर चलना होगा। रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं और आगामी आंदोलनों के बीच संघ की यह आंतरिक कलह क्या मोड़ लेती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।


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