राजस्थान की भजनलाल सरकार ने जनता के कार्यों में ढिलाई बरतने और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तर के चक्कर कटवाने वाली अलवर तहसीलदार रश्मि शर्मा पर गाज गिरी है। राज्य सरकार ने तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है (एपीओ कर दिया है) और उनका मुख्यालय राजस्व मंडल कार्यालय अजमेर तय किया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार रश्मि शर्मा के खिलाफ लंबे समय से आम जनता और स्थानीय लोगों की शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि तहसीलदार जानबूझकर लोगों के काम अटका रही थीं, जिससे जनता बेहद परेशान थी। हद तो तब हो गई जब उन्होंने जिला स्तरीय जनसुनवाई के प्रकरणों का निस्तारण नहीं किया और उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की भी लगातार अवहेलना की।
कई बार चेतावनी मिलने के बावजूद कार्यशैली में सुधार न होने पर यह मामला सरकार तक पहुँचा, जिसके बाद शासन उप सचिव हरि सिंह मीना की ओर से उन्हें हटाने के आदेश जारी किए गए। हालांकि, प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर यह आदेश 26 जून को ही तैयार कर लिया गया था, जो सोमवार को सार्वजनिक हुआ।
इधर, अलवर जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने भी ज़िले के प्रशासनिक अमले की एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) बैठक लेकर अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। बैठक में जिला परिषद के सीईओ सालुंखे गौरव रविंद्र, यूआइटी सचिव स्नेहल नाना और एडीएम प्रथम योगेश डागुर सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे।
कलक्टर ने बैठक में निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:
स्कूलों के खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाना: कलक्टर ने निर्देश दिए कि जिन सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों पर अवैध कब्जे हैं, उन्हें 15 जुलाई तक हर हाल में मुक्त कराया जाए। ज़िले में अब तक 25 स्कूलों के खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0: अभियान के तहत बचे हुए सभी कार्यों को 30 जून तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के आदेश दिए गए।
टहला तहसीलदार पर होगी कार्रवाई: जन शिकायतों के निस्तारण में देरी और मामलों को दर्ज करने में लापरवाही बरतने पर कलक्टर ने टहला तहसीलदार और संबंधित दोषी कार्मिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पीएम आवास योजना (मालाखेड़ा ब्लॉक): मालाखेड़ा क्षेत्र में स्वीकृत भूमिहीन प्रकरणों के निस्तारण के लिए नरेगा अधिशासी अभियंता को दो दिन तक उसी क्षेत्र में रहकर कैंप करने और मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार और जिला प्रशासन की इस संयुक्त और कड़ी कार्रवाई से साफ़ संदेश गया है कि जनहित के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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