कोटा। कोटा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर स्थित लबान स्टेशन की किस्मत जल्द ही पूरी तरह बदलने वाली है। कोटा रेल मंडल ने लबान स्टेशन को एक बड़े रेलवे हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत यहाँ नई 'पिट लाइन' (ट्रेनों के रखरखाव और सफाई की जगह) और 'लॉन्ग हॉल लूप लाइन' का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से कोटा के साथ-साथ सवाई माधोपुर स्टेशन से भी नई ट्रेनें शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
रेलवे ने इस पूरी योजना के लिए करीब 2 करोड़ 64 लाख 72 हजार रुपए की अनुमानित लागत तय की है। कोटा मंडल द्वारा इस कार्य को गति देने के लिए आधिकारिक रूप से टेंडर (निविदाएं) आमंत्रित कर लिए गए हैं। इस विकास कार्य के तहत लबान और उसके आसपास के स्टेशनों पर निम्नलिखित अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
साइडिंग का विकास: ट्रैक टेंपिंग मशीन (TTM) तथा रेल ग्राइंडिंग मशीन (RGM) को खड़ा करने और उनके रखरखाव के लिए विशेष साइडिंग बनाई जाएगी।
बुनियादी ढांचे का विस्तार: आवश्यकता के अनुसार नए ट्रैक, उन्नत ड्रेनेज (जल निकासी) सिस्टम, प्लेटफॉर्म का विस्तार, विद्युत (बिजली) और पानी की सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा।
लॉन्ग हॉल लूप लाइन में भारी-भरकम मालगाड़ियों को सुरक्षित खड़ा करने के लिए विशेष तकनीकी इंतजाम किए जा रहे हैं। स्टेशन और मुख्य लाइन की सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ डिरेलिंग स्विच (Derailing Switches) लगाए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि यार्ड या लूप लाइन में कोई वाहन या बोगी अनियंत्रित (रूफ मूवमेंट) होती है, तो वह मुख्य रेल लाइन (Main Line) पर आकर किसी बड़े हादसे का कारण नहीं बन सकेगी।
लबान के साथ-साथ आमली रेलवे यार्ड में भी सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। यहाँ पुराने और अपनी आयु पूरी कर चुके इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर 'वार्म स्टैंड बाय' और 'इंडोर सिग्नलिंग सिस्टम' स्थापित किया जाएगा।
ग्लूड जॉइंट्स का उपयोग: सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण के दौरान पटरियों में ग्लूड इंसुलेटेड रेल जॉइंट्स (GIRJ) लगाए जाएंगे, जो नई इंटरलॉकिंग और सिग्नल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी हैं।
क्या है ग्लूड इंसुलेटेड रेल जॉइंट्स (GIRJ)? यह रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले विशेष ट्रैक घटक हैं। इनका मुख्य काम ट्रेन की सटीक लोकेशन (पता लगाने) और सुरक्षा प्रबंधित करने के लिए अलग-अलग ट्रैक सर्किट को विद्युत रूप से (Electrically) अलग करना होता है। ये इतने मजबूत होते हैं कि हाई-स्पीड ट्रेनों और भारी मालगाड़ियों के यांत्रिक तनाव (Mechanical Stress) को आसानी से झेल सकते हैं। इनका निर्माण ग्लास क्लॉथ रोविंग, हेवी-ड्यूटी एपॉक्सी रेजिन एडहेसिव और हाई-टेन्साइल स्टील बोल्ट से किया जाता है, जो शॉर्ट-सर्किट होने से रोकते हैं।
इस विशाल परियोजना और पिट लाइन के निर्माण के लिए रेलवे को बहुत बड़ी जमीन की आवश्यकता है। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने लबान स्टेशन के आसपास बड़ी मात्रा में किसानों की भूमि का अवाप्ति (अधिग्रहण) किया है। अवाप्त की गई भूमि के बदले किसानों को जिला प्रशासन के माध्यम से मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने के लिए पिछले दिनों रेलवे बोर्ड द्वारा इस क्षेत्र का ड्रोन से सर्वे (Drone Survey) भी किया गया था। माना जा रहा है कि कागजी कार्रवाई और मुआवजे के वितरण के तुरंत बाद यहाँ धरातल पर काम शुरू हो जाएगा, जिससे हाड़ौती और सवाई माधोपुर के रेल यात्रियों के लिए भविष्य में नई ट्रेनों की सौगात मिलना तय है।
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