टा। कोटा रेल मंडल के बयाना-हिंडौन रेल खंड से भू-माफियाओं और रेलवे अधिकारियों की कथित मिलीभगत का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ फतेहसिंह पुरा और डुमरिया स्टेशनों के बीच रेलवे की बेशकीमती ज़मीन पर माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले डेढ़ साल से लगातार शिकायतों के बावजूद मंडल प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भू-माफिया इस सरकारी भूमि पर धड़ल्ले से मकान, दुकानें और होटल बनाकर बेच रहे हैं। रेलवे की संपत्ति पर अवैध निर्माण कर करोड़ों का खेल चल रहा है।
अतिक्रमण का मुख्य बिंदु:
खसरा नंबर 1264: उक्त लट्ठा नंबर 1155 के पीछे की रेलवे भूमि पर अवैध रूप से एक आलीशान होटल का निर्माण कर लिया गया है।
भेदभावपूर्ण फेंसिंग: ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे ने होटल के पास से अतिक्रमण बचाने के लिए फेंसिंग (तारबंदी) नहीं लगाई है, जबकि पास ही स्थित गांव वालों की निजी ज़मीन पर फेंसिंग कर दी गई है।
ग्रामीण राम लखन मीणा ने बताया कि कोटा मंडल रेल प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखे हुए करीब डेढ़ साल बीत चुका है। शिकायत के बाद खानापूर्ति के लिए रेलवे की टीम ने मौके पर आकर ज़मीन की नपाई भी की थी, लेकिन नपाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब तक किसी भी अवैध ढांचे को नहीं गिराया गया है, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
"रेलवे प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है। जब हमारी निजी ज़मीन पर फेंसिंग हो सकती है, तो भू-माफियाओं द्वारा बनाए गए होटल और दुकानों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चला?" — स्थानीय ग्रामीण
स्थानीय प्रशासन और कोटा मंडल की सुस्ती से तंग आकर अब ग्रामीणों ने इस मामले को सीधे रेल मंत्री तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। लोगों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर अधिकारी भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं, तो अब उच्च स्तर पर ही इसकी जांच करानी होगी।
रेलवे ने अतिक्रमण वाली ज़मीन को छोड़कर फेंसिंग क्यों की?
नपाई होने के बाद भी अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों रुकी हुई है?
क्या रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों की इसमें कोई मूक सहमति है?
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