कोटा/आगरा। रेलवे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोचुवेली-अमृतसर केरला संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12217) के लोको पायलट ने मथुरा और भूतेश्वर स्टेशनों के बीच निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हुए ट्रेन को तेज रफ्तार से दौड़ा दिया। गनीमत रही कि कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई और ट्रेन सुरक्षित निकल गई।
रेल पटरी पर रखरखाव का काम चलने के कारण आगरा रेल मंडल द्वारा मथुरा और भूतेश्वर के बीच 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का 'कॉशन ऑर्डर' (गति प्रतिबंध) जारी किया गया था। लेकिन कोटा के लोको पायलट ने इस आदेश की अनदेखी की और ट्रेन को 57 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकाल दिया। आगरा रेल मंडल ने 2 फरवरी को इस गंभीर चूक को नोटिस किया और कोटा रेल प्रशासन को इसकी विस्तृत जानकारी भेजी।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित लोको पायलट की यह पहली लापरवाही नहीं है। इस ड्राइवर का पिछला रिकॉर्ड काफी डराने वाला रहा है:
1 साल पहले: मथुरा-दिल्ली के बीच होडल स्टेशन पर 30 किमी/घंटा के प्रतिबंध के बावजूद ट्रेन को 130 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ाया था।
6 महीने पहले: कोटा के पास दरा स्टेशन पर रेल पटरी पर सुरक्षा के लिए लगाई गई लाल झंडी को काटते हुए ट्रेन निकाल दी थी।
रेलवे में सुरक्षा के लिहाज से कॉशन ऑर्डर एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
इसे फॉर्म टी/409 (T/409) के रूप में स्टेशन मास्टर द्वारा लोको पायलट और गार्ड को दिया जाता है।
इसमें रास्ते में चल रहे मरम्मत कार्य, अस्थायी गति प्रतिबंध और सावधानी बरतने वाले स्थानों की जानकारी होती है।
इन आदेशों का उल्लंघन करने पर ट्रेन के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) जैसी भीषण दुर्घटनाओं की आशंका रहती है।
इतनी गंभीर और बार-बार होने वाली गलतियों के बावजूद अभी तक लोको पायलट के खिलाफ किसी कड़ी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आगरा मंडल की रिपोर्ट के बाद कोटा रेल प्रशासन मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है।
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