कोटा | कोटा रेल मंडल में ठेका कर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। जोधपुर-भोपाल ट्रेन (14813) में जयपुर से कोटा के लिए बुक किया गया पार्सल, कोटा स्टेशन पर 20 मिनट के लंबे ठहराव के बावजूद नहीं उतारा जा सका। नतीजा यह हुआ कि सामान कोटा के बजाय सीधा भोपाल पहुँच गया।
कूरियर कंपनी के मालिक रंजीत कुमार सोनी ने बताया कि उन्होंने हैंडीक्राफ्ट सामान के दो नग शुक्रवार को जयपुर से कोटा के लिए बुक किए थे। नियमानुसार ट्रेन के कोटा पहुँचते ही इन्हें अनलोड किया जाना था। शनिवार को जब पार्सल नहीं मिला, तो इसकी शिकायत कोटा मंडल के अधिकारियों से की गई। जांच में पता चला कि माल कोच से उतारा ही नहीं गया और वह भोपाल चला गया है। अंततः रविवार को यह पार्सल भोपाल से वापस कोटा लाया गया, तब जाकर व्यापारी को राहत मिली।
कोटा स्टेशन पर पार्सल की लोडिंग और अनलोडिंग का काम रेलवे ने निजी ठेके पर दे रखा है। 20 मिनट का ठहराव किसी भी ट्रेन के लिए पर्याप्त समय होता है, लेकिन ठेका कर्मियों की सुस्ती और रेलवे पर्यवेक्षकों की निगरानी के अभाव में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहाँ:
कोटा में उतरने वाला सामान दूसरे स्टेशनों पर पहुँच गया।
जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं जैसे फल और मछली समय पर न उतारे जाने के कारण बर्बाद हो गए।
व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन रेलवे ने अब तक किसी भी जिम्मेदार ठेकेदार या कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि रेलवे की यही कार्यप्रणाली रही, तो भविष्य में लोग रेलवे पार्सल सेवा से कतराने लगेंगे।
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