रेलवे के रनिंग स्टाफ (लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड्स) के लिए एक राहत भरी खबर आई है। काफी समय से प्रतीक्षित बढ़े हुए किलोमीटर भत्ते और एएलके (ALK) की दर में वृद्धि का लाभ अब जल्द ही उनके वेतन में जुड़कर मिलेगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं।
वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (WCREU) के महामंत्री मुकेश गालव ने जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे बोर्ड द्वारा पहले ही आदेश जारी किए जा चुके थे, लेकिन तकनीकी कारणों या प्रक्रियात्मक देरी की वजह से रनिंग स्टाफ को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा था।
मुख्य समस्या: आदेश के बावजूद स्टाफ के वेतन में बढ़ी हुई दरें लागू नहीं हुई थीं।
समाधान: स्टाफ की शिकायतों के बाद यूनियन ने इस मुद्दे को रेलवे बोर्ड के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाया। परिणाम स्वरूप, बोर्ड ने तुरंत प्रभाव से 'दर परिवर्तन' (Rate Revision) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं ताकि बढ़ा हुआ भत्ता सीधे वेतन में शामिल हो सके।
रनिंग स्टाफ के लिए ये दो भत्ते उनकी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं:
किलोमीटर भत्ता (KMA): ट्रेन चलाने के दौरान तय की गई दूरी के आधार पर मिलने वाला भुगतान।
एएलके (Allowance in Lieu of Kilometre - ALK): जब रनिंग स्टाफ को ट्रेन चलाने के बजाय अन्य ड्यूटी (जैसे ट्रेनिंग या स्टेशन ड्यूटी) पर लगाया जाता है, तब किलोमीटर भत्ते के बदले उन्हें यह भत्ता दिया जाता है।
महामंत्री मुकेश गालव ने स्पष्ट किया कि हालांकि दर परिवर्तन के आदेश एक सकारात्मक कदम हैं, लेकिन यूनियन अपनी मांगों से पीछे नहीं हटी है। उन्होंने कहा:
"25 प्रतिशत की वास्तविक बढ़ोतरी (Actual Hike) के लिए हमारा संघर्ष अभी भी जारी रहेगा। रनिंग स्टाफ की मेहनत और सुरक्षा में उनके योगदान को देखते हुए यह उनका हक है।"
इस निर्णय से कोटा मंडल सहित देशभर के हजारों रेल कर्मियों के चेहरे पर मुस्कान आई है, क्योंकि इससे उनके मासिक वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी।
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