रेलवे में 'बंगला बेगारी' का बड़ा खुलासा: पीएमओ तक पहुंची शिकायत, रेलवे बोर्ड ने दिए जांच के आदेश

रेलवे में 'बंगला बेगारी' का बड़ा खुलासा: पीएमओ तक पहुंची शिकायत, रेलवे बोर्ड ने दिए जांच के आदेश

 

कोटा। भारतीय रेलवे में नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों के आवासों (बंगलों) पर कर्मचारियों से घरेलू काम कराने का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई एक विस्तृत शिकायत के बाद रेलवे बोर्ड हरकत में आया है और सभी जोनल रेलवे को इस 'संगठित भ्रष्टाचार' की जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

करोड़ों का चूना और संरक्षा से खिलवाड़

शिकायतकर्ता ने सीपी ग्राम पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है कि ट्रैकमेनटेन्र, सिग्नल स्टाफ और लोको से जुड़े सुरक्षा (Safety) कर्मचारियों को उनकी मूल जिम्मेदारियों से हटाकर अधिकारियों के निजी उपयोग में लगाया जा रहा है।

  • घरेलू काम: ये कर्मचारी बंगलों पर खाना बनाना, कपड़े धोना, बगीचे की देखभाल और बच्चों को घुमाने जैसे काम कर रहे हैं।

  • आर्थिक नुकसान: कई कर्मचारी लेवल-5 के हैं, जिनका वेतन ₹80,000 तक है, लेकिन वे ट्रॉली मैन बनकर बेगारी कर रहे हैं।

  • फर्जी हाजिरी: मस्टर रोल में इनके नाम के आगे 'D' (ड्यूटी बाहर) अंकित कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

कोटा मंडल में भी 'अंधेरगर्दी'

कोटा मंडल भी इस अव्यवस्था से अछूता नहीं है। आरोप है कि यहां ईमानदारी का दम भरने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के बंगलों पर भी आधा-आधा दर्जन कर्मचारी तैनात हैं। विजिलेंस और जांच एजेंसियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए हैं कि आखिर सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई की हिम्मत क्यों नहीं जुटाई जाती?

मेडिकल अनफिट और भर्ती में धांधली का खेल

शिकायत में रेलवे के भीतर चल रहे एक गहरे नेक्सस का पर्दाफाश किया गया है:

  1. साठगांठ से मेडिकल फेल: भारी लेनदेन के जरिए सेफ्टी कैटेगरी के कर्मचारी खुद को 'मेडिकल अनफिट' घोषित करवाकर कम जिम्मेदारी वाले विभागों में पोस्टिंग पा रहे हैं।

  2. कागजी निरीक्षण: अधिकारी 'फुट प्लेट' (इंजन पर निरीक्षण) पर जाने के बजाय केवल कागजों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। फील्ड चेकिंग के फॉर्म पहले ही भर दिए जाते हैं।

  3. सुनियोजित भर्ती: लोकल टेम्परेरी ऑर्डर और ऑप्शन के नाम पर चहेतों की भर्ती पहले से तय होती है, चयन समिति केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।

हादसों की गाज केवल छोटे कर्मचारियों पर

शिकायतकर्ता ने मर्मस्पर्शी सवाल उठाया है कि रेलवे में होने वाले ट्रैक फेल्योर और हादसों के बाद हमेशा निचले स्तर के कर्मचारियों को ही बलि का बकरा क्यों बनाया जाता है? क्या सिस्टम की विफलता की जिम्मेदारी कभी बड़े अधिकारियों पर तय होगी?

बोर्ड का रुख: प्रधानमंत्री को भेजी गई इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जोन से रिपोर्ट तलब की गई है कि कितने कर्मचारी अपनी मूल पोस्टिंग के बजाय बंगलों या कार्यालयों में संबद्ध (Attach) हैं।


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