कोटा | कोटा रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाना (वर्कशॉप) में पदों की कटौती को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। रेलवे मजदूर संघ के कड़े विरोध के आगे झुकते हुए वर्कशॉप प्रशासन को 52 पदों को सरेंडर करने का अपना निर्णय वापस लेना पड़ा है। इसे मजदूर संघ की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
रेलवे बोर्ड और मुख्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कोटा वर्कशॉप को 52 पदों को सरेंडर (समाप्त) करने या उनके पुनर्वितरण (Redistribution) का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कारखाना प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली थी और कागजी कार्यवाही अंतिम चरण में थी।
जैसे ही इस कार्यवाही की भनक रेलवे मजदूर संघ (वर्कशॉप शाखा) को लगी, पदाधिकारियों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। संघ के दबाव के चलते प्रशासन को मजबूरन अपना कदम पीछे खींचना पड़ा।
ऐतिहासिक निर्णय: वर्कशॉप संघ शाखा सचिव विपिन बिहारी शर्मा ने दावा किया कि यह पहली बार है जब संघ की कड़ी आपत्ति के बाद प्रशासन को पद समाप्ति जैसा बड़ा फैसला वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा है।
भारी दबाव: बताया जा रहा है कि मुख्यालय की ओर से इन पदों को समाप्त करने का भारी दबाव था, लेकिन कर्मचारियों के हितों को देखते हुए संघ ने इस पर अडिग रुख अपनाया।
मजदूर संघ और प्रशासन के बीच हुई वार्ता के बाद अब यह सहमति बनी है कि इन 52 पदों को सरेंडर नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से वर्कशॉप के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि पदों की कटौती से भविष्य में पदोन्नति के अवसर कम होने और कार्यभार बढ़ने का डर बना हुआ था।
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