कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन इन दिनों यात्रियों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि अवैध वेंडिंग और वेंडरों के बीच होने वाले खूनी गैंगवार के लिए अखाड़ा बनता जा रहा है। स्टेशन पर अवैध रूप से खाद्य सामग्री बेचने के वर्चस्व को लेकर वेंडर एक बार फिर सरेआम आपस में भिड़ गए। यह सनसनीखेज वारदात प्लेटफॉर्म नंबर एक पर सुबह करीब 9 बजे उस वक्त हुई, जब वहां गांधीधाम-हावड़ा गरबा एक्सप्रेस आकर खड़ी हुई थी।
चश्मदीदों के मुताबिक, एक वेंडर ट्रेन के यात्रियों को आलू बड़े बेच रहा था। इसी दौरान एक स्टॉल का वेंडर वहां आया और दूसरे वेंडर से झगड़ने लगा। उसने वेंडर को वहां से हटकर दूर जाकर आलू बड़े बेचने को कहा। देखते ही देखते दोनों के बीच बहस गाली-गलौज और फिर लात-घूसों में बदल गई।
ट्रेन के पास धक्का दिया: गुस्साए स्टॉल वेंडर ने आलू बड़े बेचने वाले को इतनी जोर से धक्का दिया कि वह सीधे चलती/खड़ी ट्रेन के पास प्लेटफॉर्म पर जा गिरा।
मच गई अफरा-तफरी: वेंडर के गिरते ही आलू बड़ों से भरी ट्रे प्लेटफॉर्म पर पलट गई और चारों तरफ खाना बिखर गया। मौके पर मौजूद अन्य वेंडरों और यात्रियों ने बड़ी मुश्किल से बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया, अन्यथा वेंडर की जान भी जा सकती थी।
चौंकाने वाला खुलासा: जांच और पूछताछ में सामने आया कि जिस स्टॉल वेंडर ने दबंगई दिखाई, वह पूरी तरह से अवैध (बिना लाइसेंस वाला) था, जबकि पिटने वाले दूसरे वेंडर के पास रेलवे का अधिकृत कार्ड बना हुआ था।
स्टेशन पर आए दिन होने वाले इन झगड़ों की मुख्य वजह 'स्टॉल के आगे' सामान बेचना है। रसूखदार स्टॉल संचालक नहीं चाहते कि उनके स्टॉल के सामने कोई अन्य वेंडर सामान बेचे। वे अन्य अधिकृत वेंडरों को स्टॉल से कम से कम तीन कोच दूर जाकर बेचने की धमकी देते हैं। उल्लेखनीय है कि कोटा स्टेशन पर अवैध वेंडिंग के इसी वर्चस्व को लेकर पूर्व में एक बार सरेआम फायरिंग (गोलीबारी) तक हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद रेल प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों ने जो खुलासे किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और रेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले हैं।
अवैध वेंडरों से पार्टनरशिप: आरोप है कि रेलवे के 'जिम्मेदार' अधिकारियों और कर्मचारियों को 'हराम की कमाई' का ऐसा चस्का लगा है कि वे खुद सीजन में मोटी कमाई के लिए लड़कों को घरों से बुला-बुलाकर अवैध वेंडिंग करा रहे हैं। इन जिम्मेदारों ने अवैध वेंडरों के साथ बाकायदा 'पार्टनरशिप' (हिस्सेदारी) कर रखी है।
अपराधियों का ठिकाना: इस अवैध धंधे को चलाने के लिए मध्य प्रदेश के भिंड और मुरैना से लड़कों को विशेष रूप से कोटा बुलवाया गया है। ये अवैध वेंडर स्टेशन पर आए दिन वैध वेंडरों को चमकाते हैं और मारने-पीटने की धमकियां देते हैं।
मर्डर की धमकियां: ये वेंडर सरेआम धौंस जमाते हैं कि वे पहले भी कई मर्डर (हत्या) कर चुके हैं और लोगों के हाथ-पैर तोड़ चुके हैं। इन खूंखार अपराधियों की पीठ पर 'जिम्मेदारों' का हाथ होता है, जो खुद स्टेशन पर खड़े रहकर इनसे खाना, बर्गर और पिज्जा बिकवाते हैं।
अवैध वेंडिंग की यह बाढ़ सिर्फ कोटा स्टेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि कोटा रेल मंडल के लगभग हर छोटे-बड़े स्टेशन पर आसानी से देखी जा सकती है। साप्ताहिक ट्रेनों में ये अवैध वेंडर खाद्य सामग्री से भरी प्लास्टिक की बड़ी-बड़ी टंकियां लेकर सफर करते हैं। हालांकि, पिछले दिनों मंडल वाणिज्य प्रबंधक किशोर पटेल द्वारा की गई एक कार्रवाई में इन संदिग्ध टंकियों को जब्त भी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी यह धंधा बंद नहीं हुआ।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए ये वेंडर अब आउटर पर खड़ी ट्रेनों को भी निशाना बना रहे हैं। माला रोड स्थित इंदिरा कॉलोनी से वेंडर अपनी एक्टिवा (स्कूटी) पर खाना, बर्गर, पिज्जा लादकर रेलवे लाइन के पास पहुंच जाते हैं।
सिग्नल का खेल: सिग्नल न मिलने के कारण जब देहरादून एक्सप्रेस जैसी बड़ी ट्रेनें आउटर पर खड़ी होती हैं, तो ये वेंडर उन पर धावा बोल देते हैं। अगर ट्रेन आउटर पर नहीं रुकती, तो ये वेंडर जान जोखिम में डालकर पटरियों के सहारे दौड़ते हुए स्टेशन तक पहुंच जाते हैं और यात्रियों को खाना सप्लाई करते हैं।
पूर्व में आरपीएफ (RPF) ने इस आउटर गैंग के खिलाफ कुछ कार्रवाई की थी, लेकिन सांठगांठ के चलते इसका कोई असर नहीं हुआ। आज स्टेशन और ट्रेनों में घूम रहे ये सैकड़ों अवैध वेंडर यात्रियों से लेकर आम जनता तक सबको साफ नजर आ रहे हैं, अगर किसी को नजर नहीं आ रहे, तो वह है कोटा मंडल रेल प्रशासन, जो सब कुछ देखकर भी जानबूझकर अंधा बना बैठा है।
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