कोटा/रामगंजमंडी। कोटा मंडल के रामगंजमंडी-मोडक रेलवे स्टेशनों के बीच रविवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा टल गया। पटरी टूटी होने के बावजूद उसी ट्रैक पर तेज रफ्तार कोटा-चोमेहला मेमू ट्रेन (61624) आ रही थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कीमैन की सूझबूझ और बहादुरी ने ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचा लिया।
रविवार सुबह करीब 7:15 बजे कीमैन कैलाश मीणा और अशोक मीणा रूटीन गश्त पर थे। अप लाइन पर अचानक उन्हें करीब पौन इंच (16 एमएम) टूटी हुई पटरी नजर आई। ठीक उसी समय सामने से मेमू ट्रेन आती दिखाई दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों ने तुरंत मोर्चा संभाला:
अशोक मीणा ने तुरंत पटरी की अस्थायी मरम्मत की तैयारी शुरू की।
कैलाश मीणा ने बिना वक्त गंवाए हाथ में लाल झंडी ली और ट्रेन की दिशा में दौड़ लगा दी।
ट्रेन को रोकने के लिए कैलाश ने जान की बाजी लगा दी। दौड़ते हुए उन्होंने नियमों के अनुसार पटरी पर कई जगह डेटोनेटर (पटाखे) भी रखे। लोको पायलट ने जब दूर से कीमैन को लाल झंडी लेकर अपनी ओर दौड़ते देखा, तो तुरंत खतरा भांप लिया और इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को टूटी पटरी से करीब 400 मीटर पहले ही सुरक्षित रोक लिया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पटरी वेल्डिंग के पास से टूटी थी। आमतौर पर ऐसी घटनाएं कड़ाके की सर्दी में 'रेल फ्रैक्चर' के कारण होती हैं, लेकिन इस बार सर्दियों में ऐसे मामले नगण्य रहे। गर्मी की शुरुआत में इस तरह बेमौसम पटरी टूटना चिंता का विषय है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।
घटना के बाद करीब 20 मिनट तक मेमू ट्रेन मौके पर खड़ी रही। रेल पथ इंजीनियरों ने मौके पर पहुँचकर पटरी की मरम्मत करवाई, जिसके बाद मेमू को 10 किमी/घंटा और अन्य ट्रेनों को 30 किमी/घंटा की रफ्तार से सावधानीपूर्वक निकाला गया। अब ट्रैक को पूरी तरह दुरुस्त कर परिचालन सामान्य कर दिया गया है।
हीरो ऑफ द डे: कीमैन कैलाश मीणा और अशोक मीणा।
बचाव: मेमू ट्रेन (61624) को 400 मीटर पहले रोका गया।
नुकसान: पटरी में करीब 16 एमएम का फ्रैक्चर।
स्थान: रामगंजमंडी और मोडक स्टेशनों के बीच।
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