राजस्थान में बघेरों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप पद्धति का होगा उपयोग

राजस्थान में बघेरों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप पद्धति का होगा उपयोग

जयपुर: राजस्थान में बघेरों की बढ़ती संख्या और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर बघेरों की गणना का फैसला लिया है। वन मंत्री श्री संजय शर्मा ने प्रदेश के सभी संरक्षित क्षेत्रों में टाइगर रिजर्व को छोड़कर बघेरों की गिनती कैमरा ट्रैप पद्धति से करने के निर्देश दिए हैं।

क्यों जरूरी है बघेरों की गणना?

बघेरों की बढ़ती संख्या के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में उदयपुर जिले में बघेरों द्वारा आठ लोगों को मारने की घटनाएं सामने आई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए बघेरों की संख्या पर नियंत्रण करना आवश्यक है।

कैसे होगी बघेरों की गणना?

बघेरों की गणना के लिए कैमरा ट्रैप पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इस पद्धति में कैमरे को जंगल में लगाया जाता है जो किसी भी जानवर के आने पर उसकी तस्वीर खींच लेता है। इन तस्वीरों के आधार पर बघेरों की संख्या का अनुमान लगाया जाता है।

कौन करेगा गणना का काम?

मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक श्री पवन कुमार उपाध्याय ने सभी वन्य जीव प्रभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस कार्य में लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, इस कार्य में विशेषज्ञों और विशेषज्ञ संस्थानों की सलाह और सहयोग भी लिया जाएगा।

इससे क्या फायदा होगा?

  • बघेरों की सही संख्या का पता चल पाएगा।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
  • बघेरों के संरक्षण के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
  • वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

निष्कर्ष:

राजस्थान में बघेरों की गणना का यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बघेरों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।

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