कोटा। रेलवे के कैरिज एंड वैगन (सीएंडडब्ल्यू) सहित अन्य विभागों के सरप्लस कर्मचारियों को गार्ड (ट्रेन मैनेजर) बनाने के मामले में गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को डबल बेंच द्वारा की जाएगी।
यह मामला तब सामने आया जब रेलवे ने करीब 20 दिन पहले कुछ कर्मचारियों को सरप्लस घोषित कर दिया और आनन-फानन में दो दिन के भीतर ही उनकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर गार्ड की ट्रेनिंग के लिए उदयपुर भेज दिया। सूत्रों के अनुसार, उदयपुर भेजे गए कर्मचारियों में एक बड़े अधिकारी का ड्राइवर भी शामिल बताया जा रहा है, जिसके चलते इस कार्रवाई को इतनी तेजी से पूरा करने की बात कही जा रही है।
गौरतलब है कि सरप्लस किए गए कर्मचारियों में से कुछ 4200 ग्रेड-पे वाले हैं। रेलवे द्वारा इन कर्मचारियों को भी गार्ड बना दिया गया है। इससे पहले से गार्ड के पद पर कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होने की आशंका है, साथ ही उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। इस स्थिति के कारण, पहले से कार्यरत गार्ड, प्रशासन पर केवल 2800 ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों को ही गार्ड बनाने का दबाव बना रहे हैं, जो दूसरे विभागों से आए हैं।
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