जेसीबी खरीद में ₹12.87 लाख के घोटाले का मामला: निगम ने उप निदेशक की रिपोर्ट नकारी, एक दिन में जांच कर दी क्लीन चिट

जेसीबी खरीद में ₹12.87 लाख के घोटाले का मामला: निगम ने उप निदेशक की रिपोर्ट नकारी, एक दिन में जांच कर दी क्लीन चिट

अलवर: अलवर नगर निगम द्वारा जेसीबी (बैकहोय लोडर) की खरीद में ₹12.87 लाख के कथित घोटाले का मामला गर्मा गया है। स्थानीय निकाय विभाग के उप निदेशक विनोद पुरोहित (जयपुर) की जांच रिपोर्ट में जहाँ यह घोटाला पाया गया था, वहीं नगर निगम प्रशासन ने इस रिपोर्ट को नकार दिया है और आनन-फानन में एक ही दिन में अपनी जांच पूरी कर कथित रूप से आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है।

उप निदेशक की रिपोर्ट में घोटाला पुष्ट

स्थानीय निकाय विभाग, जयपुर के उप निदेशक विनोद पुरोहित की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अलवर नगर निगम द्वारा खरीदी गई दो जेसीबी मशीनों के स्पेसिफिकेशन (Specifications) समान हैं, लेकिन उनकी खरीद में गाजियाबाद नगर निगम की तुलना में ₹12 लाख 87 हजार 532 अधिक क्रय किया जाना पाया गया है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता की जांच पुष्ट पाई गई है।

पुरोहित ने निगम आयुक्त से खरीद में शामिल अधिकारी व कार्मिकों के नाम मांगे थे ताकि डीएलबी (DLB) की ओर से चार्जशीट जारी हो सके। आरोप है कि निगम ने इस लेटर को करीब 25 दिन तक दबाए रखा, और जब मीडिया में इसका खुलासा हुआ, तो आनन-फानन में खुद ही जांच कर रिपोर्ट नकार दी।

नगर निगम आयुक्त की 'क्लीन चिट' रिपोर्ट

नगर निगम आयुक्त जीतेंद्र सिंह नरूका ने अपनी जांच रिपोर्ट में उप निदेशक की रिपोर्ट को नकारते हुए तर्क दिया है कि अलवर और गाजियाबाद नगर निगम द्वारा क्रय की गई बैकहोय लोडर मशीनों में भिन्नताएं पाई गई हैं, जिसके कारण दरों में विचलन आया है।

निगम आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, अलवर में दर ₹6.43 लाख प्रति नग अधिक होने का मुख्य कारण ये हैं कि अलवर की जेसीबी में निम्नलिखित अधिक खूबियां हैं:

  • बैकहोय लोडर का फोर-व्हील ड्राइव होना।

  • लोडर बकेट की न्यूनतम क्षमता 0.1 घनमीटर अधिक होना।

  • ऑपरेटिंग वेट 100 किलो अधिक होना।

प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

निगम प्रशासन द्वारा इतनी त्वरित जांच और क्लीन चिट दिए जाने पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • आखिर इतनी खूबियां होने के बावजूद, ये जेसीबी मशीनें 5 माह से क्यों खड़ी हैं?

  • शहर के कामों के लिए इन्हें अब तक धरातल पर क्यों नहीं लाया गया?

  • उप निदेशक की रिपोर्ट आने से पहले इस मामले की जांच क्यों नहीं कराई गई?

  • क्या निगम प्रशासन तीन फंस रहे अफसरों को बचाने के लिए जुटा हुआ है?

फिलहाल, निगम की इस 'क्लीन चिट' के बाद अब सबकी निगाहें डीएलबी (DLB) और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि इस विरोधाभासी मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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