15 दिन पहले कोटा से गए थे- पुराने कपड़ों में बर्तन बेचने का करते थे काम
कोटा। सवाई माधोपुर में शनिवार को कपड़ों की पोटली के नीचे दबकर एक बुजुर्ग दंपति की मौत हो गई। दोनों पति-पत्नी कोटा के रहने वाले थे। दोनों पुराने कपड़ों के बदले में बर्तन बेचने का धंधा करते थे। सूचना पर परिजन दोनों के शव को कोटा ले आए। अंतिम संस्कार रविवार को होगा।
यह दोनों नयापुरा चंबल पुलिया के नीचे गुजराती बस्ती के रहने वाले थे। पति राजू गुजराती (60) और पत्नी नर्मदा (58) करीब 15 दिन पहले अपने पुश्तैनी काम पुराने कपड़ों के बदले बर्तन बेचने के लिए सवाई माधोपुर गए थे।
यहां पर यह दोनों रेलवे स्टेशन के सामने बागड़ धर्मशाला में रह रहे थे। 15 दिन में दोनों ने नए बर्तन देकर लोगों से बड़ी मंत्रा में पुराने कपड़े एकत्रित कर लिए। दोनों ने इन कपड़ों की 30-40 पोटलियां बना लीं और अपने कमरे में ही इनको एक के ऊपर एक रख दिया।
रात में गिरी पोटलियां
काम खत्म होने के बाद रोज की तरह दोनों अपने कमरे में सो गए। रात में किसी वक्त यह पोटलियां अचानक दोनों को ऊपर गिर गईं। एक के ऊपर एक पोटली गिरने से दोनों को ऊपर काफी वजन हो गया। बुजुर्ग होने के कारण दोनों इस वजन को अपने ऊपर से नहीं हटा सके और दम घुटने से दोनों की मौत हो गई।
दरवाजा तोड़कर निकले शव
काम के चलते दोनों सुबह रोज 6 बजे उठ जाते थे। लेकिन 8:00 तक भी कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर पड़ोसियों ने दोनों को आवाज़ लगाई लेकिन इसके बाद भी कमरे का दरवाजा नहीं खुला इसके बाद इन लोगों ने कोटा में परिजनों को सूचना दी परिजनों के कहने पर लोगों ने कमर का दरवाजा तोड़कर देखा तो दोनों अंदर पोटलियों के नीचे दबे हुए थे इसके बाद लोगों ने फटाफट दोनों के ऊपर से तुरंत पोटलिया हटाई लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई लेकिन परिजनों के मना करने पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए सावन को सौंप दिया इसके बाद दोनों केशव कोटा पहुंचने ही बस्ती में अशोक के लहर दौड़ गई गुजरात से परिजनों के पहुंचने के बाद कोटा में दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा
70 साल से रह रहे थे कोटा में
अहमदाबाद के चरेरा गांव के रहने वाले राजू गुजराती करीब 70 साल से कोटा में रह रहे थे। यहां वह शुरू से ही पुराने कपड़ों के बदले नए बर्तन बेचने का पुश्तैनी काम कर रहे थे। राजू के दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं दो पुत्रियां अहमदाबाद में रहती है जबकि दो पुत्र कोटा में रहते हैं।
राजू यहां गुजराती बस्ती के मुखिया भी थे और लगातार सामाजिक कार्य भी करते रहते थे।
सूचना पर कर्मयोगी सेवा संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन कर्म योगी ने परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
धंधा बना मौत का कारण
इस घटना को सुनकर हर कोई हैरान है। लोगों में चर्चा है कि इनका धंधा ही उनकी मौत का कारण बन गया। इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ऐसा भी हो सकता है। जीवन देने वाला काम ही मौत का कारण बन जाए।