जयपुर।
जयपुर के प्रतिष्ठित 'नीरजा मोदी स्कूल' की चौथी मंजिल से गिरकर हुई 9 वर्षीय मासूम छात्रा अमायरा मीणा की संदिग्ध मौत के करीब आठ महीने बाद पुलिस ने आखिरकार न्यायालय में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है। चार्जशीट पेश होने के बाद अमायरा के परिजनों और संयुक्त अभिभावक संघ ने जयपुर के पिंकसिटी प्रेस क्लब में एक भावुक और आक्रोशित प्रेस वार्ता का आयोजन किया।
प्रेस वार्ता में मृतका के पिता विजय मीणा, माता शिवानी मीणा, संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन 'बिट्टू' ने पुलिस की अब तक की जांच पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और दोषी अधिकारियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठाई है।
अमायरा के पिता विजय मीणा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बेहद भारी मन से कहा:
"पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट पेश करना न्याय की दिशा में केवल पहला कदम है। लेकिन जब तक हमारी मासूम बेटी को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर करने वाले और मामले को दबाने वाले असली दोषी सलाखों के पीछे नहीं जाते, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक दोषियों को सख्त से सख्त सजा नहीं मिल जाती।"
प्रेस वार्ता के दौरान अमायरा की मां शिवानी मीणा अपने आंसू नहीं रोक पाईं। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली और स्कूल प्रशासन के रसूख पर तीखे प्रहार किए:
जांच से असंतुष्टि और प्रताड़ना का आरोप: माँ शिवानी ने कहा, "हम पुलिस की इस ढीली जांच से पूरी तरह असंतुष्ट हैं। न्याय देना तो दूर, पुलिस ने जांच के नाम पर हमें ही तरह-तरह के चुभते सवाल पूछकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।"
पैसे और रसूख का खेल: उन्होंने रोते हुए आरोप लगाया, "नीरजा मोदी स्कूल वाले बहुत बड़े और रसूखदार लोग हैं। हम न्याय की गुहार लेकर जहां भी अधिकारियों के पास जाते हैं, उससे पहले ही इन बड़े लोगों के पैसे और रसूख वहां पहुंच जाते हैं।"
जारी किया आखिरी वीडियो: माता-पिता ने मीडिया के सामने घटना के दिन का एक सीसीटीवी (CCTV) वीडियो भी जारी किया, जिसमें अमायरा की मौत से ठीक पहले का पूरा घटनाक्रम और स्कूल प्रशासन की लापरवाही साफ रिकॉर्ड है।
यह दिल दहला देने वाली घटना पिछले साल 1 नवंबर को जयपुर के मानसरोवर इलाके में स्थित नीरजा मोदी स्कूल में घटित हुई थी:
चौथी मंजिल से संदिग्ध पतन: कक्षा चौथी की छात्रा अमायरा ने स्कूल बिल्डिंग की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर (या कूदकर) दम तोड़ दिया था। इस घटना का लाइव सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
बुलिंग (प्रताड़ना) की अनदेखी: परिजनों का सीधा आरोप है कि स्कूल के कुछ बच्चे अमायरा को लगातार परेशान (बुलिंग) करते थे। इस संबंध में क्लास टीचर और स्कूल अथॉरिटी को कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी मानसिक प्रताड़ना के चलते मासूम ने यह कदम उठाया।
सबूत मिटाने का संगीन आरोप: परिजनों ने स्कूल पर कानूनी रूप से सबसे गंभीर आरोप यह लगाया है कि जिस जगह बच्ची गिरी थी, वहां से खून के धब्बों को स्कूल प्रशासन ने तुरंत पानी से धुलवाकर साफ करवा दिया था। मौका-ए-वारदात से सबूत सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया गया।
प्रेस वार्ता में मौजूद संयुक्त अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने इस मामले को निजी स्कूलों की तानाशाही और बाल सुरक्षा मानकों की अनदेखी का चरम उदाहरण बताया। संघ ने सरकार और न्यायपालिका से निम्नलिखित मांगें की हैं:
पॉक्सो/जेजे एक्ट की धाराएं जुड़ें: स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल के खिलाफ आत्महत्या के उकसावे (Abetment), सबूत मिटाने और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा-75 (बच्चे के प्रति क्रूरता और लापरवाही) के तहत सख्त धाराओं में मुकदमा चलाकर गिरफ्तारी हो।
एंटी-बुलिंग सिस्टम हो अनिवार्य: राजस्थान के सभी निजी स्कूलों में 'एंटी-बुलिंग और एंटी-हैरसमेंट सिस्टम' को कानूनी रूप से लागू किया जाए।
प्रशिक्षित काउंसलर और सीसीटीवी: हर बड़े स्कूल में बच्चों के मानसिक तनाव को समझने के लिए अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त हों और स्कूल के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी निगरानी के कड़े नियम बनें।
अभिभावक संघ और पीड़ित परिवार ने साफ कर दिया है कि यदि रसूख के दम पर इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, तो जयपुर की सड़कों पर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
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