कोटा। कोटा रेल मंडल में रेल संरक्षा (Safety) को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मंडल में कार्यरत कई लोको इंस्पेक्टर (LI) और ऑफिस ड्यूटी में तैनात लोको पायलट बिना अनिवार्य मेडिकल परीक्षण (PME) के ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नियमों की इस अनदेखी को रेल संचालन और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
रेलवे नियमों के अनुसार, इंजन संचालन और संरक्षा से जुड़े कर्मचारियों का एक निश्चित अंतराल पर 'पीरियोडिकल मेडिकल एग्जामिनेशन' (PME) होना अनिवार्य है। लेकिन कोटा मंडल में कई लोको इंस्पेक्टर ऐसे हैं जिनका लंबे समय से मेडिकल नहीं हुआ है। आश्चर्यजनक बात यह है कि फील्ड के साथ-साथ ऑफिस में अटैच किए गए लोको पायलटों का भी यही हाल है—वे भी बिना फिटनेस जांच के काम कर रहे हैं।
लोको इंस्पेक्टर का पद रेल सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। एक लोको इंस्पेक्टर के अधीन लगभग 50 लोको पायलट और सहायक लोको पायलट होते हैं। उनका मुख्य कार्य:
लोको पायलटों की काउंसलिंग करना।
उन्हें संरक्षा नियमों और तकनीकी बारीकियों की जानकारी देना।
दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सचेत करना।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब काउंसलिंग करने वाला अधिकारी खुद ही अनिवार्य मेडिकल नियमों का पालन नहीं कर रहा, तो वह अपने अधीन कार्यरत पायलटों को संरक्षा के प्रति कितना गंभीर रख पाएगा? यह स्थिति न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि मानवीय भूल के कारण होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को न्योता भी दे रही है।
कोटा मंडल में वर्तमान में 25 से अधिक लोको इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। इनके कंधों पर मंडल की ट्रेनों को सुरक्षित चलाने वाले सैकड़ों क्रू मेंबर्स की मॉनिटरिंग का जिम्मा है। बिना मेडिकल फिटनेस के काम करने का यह मामला उजागर होने के बाद अब रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन अधिकारियों और कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा।
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