जयपुर।राजस्थान में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए केवल अंग्रेजी शिक्षा का दिखावा किया और छात्रों एवं अभिभावकों को छलने का काम किया।
भ्रामक नीतियों का आरोप
मदन दिलावर ने कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत है भ्रामक बयान देकर जनता को गुमराह करना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपनी सत्ता के दौरान केवल हिंदी माध्यम स्कूलों पर अंग्रेजी माध्यम के बोर्ड लगा दिए, लेकिन स्कूलों को चालू रखने के लिए जरूरी शिक्षकों की भर्ती या बजट का प्रावधान नहीं किया। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
स्कूलों की समीक्षा और विपक्ष का हमला
राज्य में संचालित 3,737 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया है। समिति स्कूलों की उपयोगिता, भवन, स्टाफ की स्थिति और अन्य सुविधाओं का आकलन कर रही है। कांग्रेस ने इस कदम को जनविरोधी बताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार सुविधाएं मुहैया कराना छोड़कर गरीब बच्चों का अंग्रेजी पढ़ने का हक छीनने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की गलत नीतियों पर दिलावर का पलटवार
शिक्षा मंत्री दिलावर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बदलने के नाम पर केवल एक "षड्यंत्र" रचा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने शिक्षकों की भर्ती और संसाधनों की व्यवस्था करने के बजाय इन स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई। इसके विपरीत, बीजेपी सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भ्रष्टाचार के आरोप
मदन दिलावर ने कांग्रेस पर शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय ट्रांसफर उद्योग और पेपर चोरी जैसे कृत्यों से शिक्षा के स्तर को गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने 2013 से 2018 के बीच शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान को देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचाया था।
कांग्रेस की चेतावनी
गोविंद सिंह डोटासरा ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी सरकार ने समीक्षा के नाम पर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के खिलाफ कोई कदम उठाया तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी।
समीक्षा प्रक्रिया जारी
शिक्षा विभाग ने जिला और उपखंड स्तर पर संचालित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से संबंधित जानकारी मांगी है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में जारी रखा जाए और किन्हें हिंदी माध्यम में तब्दील किया जाए।
यह मुद्दा प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। दोनों दलों के बीच शिक्षा सुधारों और संसाधन प्रबंधन को लेकर बहस गर्म है।
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