वीआईपी (VIP) कल्चर की सनक: स्टेशन पर 'नेताजी' के इंतजार में 25 मिनट रुकी रही एक्सप्रेस ट्रेन, यात्री होते रहे परेशान

वीआईपी (VIP) कल्चर की सनक: स्टेशन पर 'नेताजी' के इंतजार में 25 मिनट रुकी रही एक्सप्रेस ट्रेन, यात्री होते रहे परेशान

कोटा। भारतीय रेलवे जहां एक तरफ ट्रेनों को समय पर चलाने (पंक्चुअलिटी) के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी कल्चर (VIP Culture) के आगे यह सारे नियम-कायदे बौने साबित हो जाते हैं। ताजा मामला रविवार रात कोटा रेलवे स्टेशन से सामने आया, जहाँ एक रसूखदार 'नेताजी' के इंतजार में एक ट्रेन को करीब 25 मिनट तक प्लेटफॉर्म पर ही रोक कर रखा गया। नेताजी के ठाठ से स्टेशन पहुंचने के बाद ही ट्रेन को आगे के लिए हरी झंडी दिखाई गई, लेकिन इस दौरान ट्रेन में बैठे आम यात्री बेवजह परेशान होते रहे।

जब तक नेताजी नहीं आए, तब तक नहीं हिली ट्रेन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात कोटा स्टेशन पर दिल्ली जाने वाली एक प्रमुख ट्रेन अपने निर्धारित समय पर प्रस्थान के लिए तैयार थी। सिग्नल और समय होने के बावजूद ट्रेन को प्लेटफॉर्म से रवाना नहीं किया गया। पूछताछ करने पर पता चला कि किसी बड़े 'नेताजी' की सवारी अभी तक स्टेशन नहीं पहुंची है।

ट्रेन पूरे 25 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी वीआईपी का इंतजार करती रही। इस दौरान अपनी मंजिलों तक पहुंचने की जल्दी में बैठे सैकड़ों यात्री इस अघोषित देरी से हलाकान होते रहे। आखिरकार जब नेताजी लाव-लश्कर के साथ प्लेटफॉर्म पर पहुंचे और कोच में सवार हुए, तब जाकर ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हो सकी।

कोटा स्टेशन पर आम बात है 'रसूखदारों' के लिए ट्रेनों को रोकना

चौंकाने वाली बात यह है कि कोटा स्टेशन पर वीआईपी लोगों के लिए बकायदा नियमों को ताक पर रखकर ट्रेनों को रोकने का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्टेशन से जुड़े सूत्रों और नियमित यात्रियों की मानें तो लगभग हर बार ही ऐसा होता है। रसूखदारों के आने के समय के अनुसार ट्रेन को लेट करने का समय कम या ज्यादा होता रहता है।

चंबल पुल पर रोक दी थी ट्रेन: वीआईपी सनक का एक पुराना और हैरान करने वाला उदाहरण देते हुए लोगों ने बताया कि एक बार तो हद ही हो गई थी जब इन्हीं 'नेताजी' का कोई कीमती सामान स्टेशन पर ही छूट गया था। सामान वापस लाने के लिए नेताजी की ट्रेन को बीच रास्ते में चंबल नदी के पुल पर करीब आधा घंटा (30 मिनट) तक खड़ा रखा गया था।

आम यात्रियों के समय की कोई कीमत नहीं?

इस घटना के बाद एक बार फिर रेलवे की कार्यप्रणाली और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां आम आदमी की एक मिनट की देरी होने पर ट्रेन छूट जाती है और टिकट का पैसा भी डूब जाता है, वहीं नेताओं के लिए पूरी ट्रेन को बंधक बना दिया जाता है। यात्रियों ने इस वीआईपी कल्चर पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए रेल मंत्रालय से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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