Rail News: बारिश के मौसम में कोटा मंडल के रेलवे ट्रैक पर कई जीव-जंतुओं के फंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। शुक्रवार रात को बारां जिले के छजावा क्षेत्र में एक मगरमच्छ और एक अजगर ट्रेन की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। वहीं, एक कछुआ बाल-बाल बच गया।
मगरमच्छ और अजगर की मौत:
- अजगर: छजावा रेलवे स्टेशन यार्ड में एक अजगर रात में कोटा जाने वाली मेमू ट्रेन की चपेट में आ गया। अजगर की लंबाई लगभग छह फीट थी।
- मगरमच्छ: छजावा और पिपलोद स्टेशनों के बीच एक मगरमच्छ एक मालगाड़ी की चपेट में आ गया। इस घटना में मगरमच्छ का सिर धड़ से अलग हो गया। मगरमच्छ की लंबाई लगभग पांच फीट बताई जा रही है।
कछुआ बाल-बाल बचा:
- बारां रेलखंड में मोतीपुरा स्टेशन के पास एक कछुआ बारिश के पानी में बहकर रेल पटरी पर पहुंच गया। किस्मत से यह कछुआ ट्रेन की चपेट में आने से बच गया।
- ट्रेकमैनों ने कछुए को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
संरक्षित जीवों की मौत:
मगरमच्छ और अजगर दोनों ही संरक्षित श्रेणी के जीव हैं। इनके मारे जाने पर कानूनी कार्रवाई होती है।
बार-बार होती हैं ऐसी घटनाएं:
इससे पहले भी बूंदी रेलखंड में एक अजगर और दरा में एक बाघ सहित कई जंगली जानवरों की मौत ट्रेन से कटने से हो चुकी है।
कारण:
- बारिश के मौसम में जंगली जानवरों का आवास क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जिसके कारण वे भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में रेल पटरियों पर आ जाते हैं।
- रेलवे ट्रैक के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण भी जानवरों की मौत होती है।
क्या किया जा सकता है:
- रेलवे प्रशासन को रेलवे ट्रैक के आसपास बाड़ लगाकर जंगली जानवरों के आवागमन को रोकना चाहिए।
- वन विभाग को जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए अधिक जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
- स्थानीय लोगों को भी जंगली जानवरों के प्रति संवेदनशील बनाना चाहिए।