करोड़ों खर्च फिर भी ढाक के तीन पात: लाखेरी स्टेशन पर उबलता पानी पीने को मजबूर यात्री, मूलभूत सुविधाओं का टोटा

करोड़ों खर्च फिर भी ढाक के तीन पात: लाखेरी स्टेशन पर उबलता पानी पीने को मजबूर यात्री, मूलभूत सुविधाओं का टोटा

कोटा। रेलवे प्रशासन द्वारा स्टेशनों के आधुनिकीकरण और विकास के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। ताजा मामला कोटा मंडल के लाखेरी स्टेशन से सामने आया है, जहाँ विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यात्रियों को आज के समय में भी मूलभूत जन सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में स्टेशन पर पर्याप्त पुख्ता इंतजाम न होने के कारण बड़ी संख्या में यात्री उबलता हुआ पानी पीने को मजबूर हैं।

प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक भी वाटर कूलर नहीं, नलों से आ रहा खौलता पानी

लाखेरी स्टेशन पर यात्रियों की भारी संख्या के मुकाबले वाटर कूलरों का भारी अभाव है। प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर कहने को मात्र एक-एक वाटर कूलर लगाया गया है, जो यात्रियों की भारी तादाद को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

लापरवाही की हद: हद तो तब हो जाती है जब प्लेटफॉर्म नंबर एक की स्थिति पर नजर पड़ती है। इस पूरे प्लेटफॉर्म पर एक भी वाटर कूलर नहीं है। इसके चलते यहाँ आने-जाने वाले यात्री नलों से आने वाला भीषण गर्म (उबलता) पानी पीने को विवश हैं।

जन सुविधाओं का अभाव: महिला यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर यात्रियों के लिए पर्याप्त संख्या में जन सुविधाओं (शौचालय व मूत्रालय) का भारी टोटा है। रेलवे को प्लेटफॉर्म विकास के साथ-साथ इस संवेदनशील विषय का विशेष ध्यान रखना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उचित व्यवस्था न होने के कारण यहाँ सबसे ज्यादा मानसिक और शारीरिक परेशानी महिला यात्रियों को उठानी पड़ रही है।

न बैठने को बेंच, न सिर पर शेड: दिव्यांगों का सफर हुआ दर्दनाक

स्टेशन पर केवल पानी और शौचालय की ही समस्या नहीं है, बल्कि अव्यवस्थाओं की सूची काफी लंबी है:

  • टूटी-फूटी और कम बेंचें: स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंचें मौजूद नहीं हैं। जो चंद बेंचें लगी भी हैं, उनमें से कई बुरी तरह टूटी-फूटी पड़ी हैं। इसके चलते यात्रियों को घंटों खड़े रहकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। इस स्थिति में सबसे ज्यादा दर्द दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों को झेलना पड़ रहा है।

  • अधूरा शेड: पूरे प्लेटफॉर्म पर शेड (टीन शेड) नहीं लगाया गया है। आधा प्लेटफॉर्म खुला होने के कारण यात्रियों को कड़कड़ाती धूप और अचानक होने वाली बारिश में भीगने व परेशान होने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

  • निर्माण कार्य में सुस्ती: प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 पर चल रहे निर्माण कार्यों में लगातार हो रही देरी ने यात्रियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। कछुआ गति से चल रहे काम के कारण स्टेशन पर हर तरफ अव्यवस्था फैली हुई है।

"जल्द होगा समाधान" — स्टेशन अधीक्षक का बंधा-बंधाया जवाब

इस पूरी बदहाली और यात्रियों के आक्रोश पर जब लाखेरी स्टेशन अधीक्षक ओमप्रकाश बैरवा से बात की गई, तो उन्होंने हमेशा की तरह एक रटा-रटाया आश्वासन दिया। स्टेशन अधीक्षक ने कहा— "रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं का पर्याप्त ध्यान रखा जा रहा है। स्टेशन पर जो भी कमियां हैं, उन्हें जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। इस पूरे मामले और जनसमस्याओं से कोटा मंडल के उच्च अधिकारियों को लिखित में अवगत करवा दिया गया है।"

अब देखना यह होगा कि करोड़ों का बजट डकारने के बाद भी प्यासे और परेशान घूम रहे यात्रियों को कोटा रेल मंडल कब तक इस 'नरक' से मुक्ति दिला पाता है।

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