कोटा/बयाना | पश्चिम-मध्य रेलवे के कोटा मंडल में अमृत भारत योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। बयाना जंक्शन पर पुनर्विकास कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है और उद्घाटन से पहले ही स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगा स्टेशन का नाम उखड़कर नीचे गिर गया।
बयाना स्टेशन के प्रवेश द्वार पर बड़े और चमकदार अक्षरों में स्टेशन का नाम लिखा गया था, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के कारण अक्षर एक-एक कर गिरने लगे हैं। आलम यह है कि हिंदी में लिखे 'बयाना' में से 'बया' गायब हो चुका है और अब केवल 'ना' बचा है। इसी तरह अंग्रेजी में लिखे नाम से 'Junction' के अक्षर भी उखड़ गए हैं। जिस मटेरियल और फिनिशिंग पर लाखों खर्च किए गए, वह अब स्टेशन परिसर के कचरे में पड़ा नजर आ रहा है।
बयाना स्टेशन पर करीब 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से पुनर्विकास कार्य कराया जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब काम की पोल खुली हो:
टपकता स्टेशन: इसी साल जनवरी में हुई पहली 'मावठ' (बेमौसम बारिश) में ही पूरा नया बना स्टेशन पानी से लबालब हो गया था।
गंगापुर का हाल: बयाना ही नहीं, गंगापुर स्टेशन पर भी बारिश के दौरान घटिया निर्माण के चलते जलभराव की तस्वीरें सामने आई थीं।
हैरानी की बात यह है कि कोटा मंडल के कई स्टेशनों पर घटिया निर्माण और घटिया सामग्री के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन रेल प्रशासन अब तक किसी भी ठेकेदार या जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि अगर उद्घाटन से पहले ही अक्षरों का यह हाल है, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
लागत: ₹25 करोड़ का प्रोजेक्ट।
हालत: नाम के अक्षर उखड़े, स्टेशन की छत से टपकता पानी।
प्रशासन: कोटा मंडल की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं।
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