कोटा | रेलवे के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर बयाना रेलवे स्टेशन पर साफ देखने को मिला। कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले इस स्टेशन पर शुक्रवार को हुई पहली मावठ (बेमौसम बारिश) ने रेलवे के विकास कार्यों की कलई खोलकर रख दी। अमृत भारत योजना के नाम पर खर्च किए गए 25 करोड़ रुपये पानी में बहते नजर आए।
अमृत भारत योजना के तहत बयाना स्टेशन का कायाकल्प करने के लिए हाल ही में फर्श, नई बेंचें और टीन शेड की मरम्मत का काम किया गया था। लेकिन शुक्रवार को जैसे ही बारिश शुरू हुई, टीन शेड जगह-जगह से टपकने लगा। आलम यह था कि यात्रियों के बैठने के लिए लगाई गई नई बेंचें और नया फर्श पूरी तरह भीग गया।
यात्रियों को बैठने की जगह मिलना तो दूर, प्लेटफार्म पर खड़े रहना भी मुश्किल हो गया। यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर मामूली मावठ में यह हाल है, तो मानसून की भारी बारिश में स्टेशन का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
हैरानी की बात यह है कि यह पहली बार नहीं है। ठीक एक साल पहले जनवरी में भी नया बना यात्री प्रतीक्षालय (वेटिंग हॉल) पहली ही बारिश में टपक गया था। वह प्रतीक्षालय भी उद्घाटन के महज 3 महीने बाद ही जवाब दे गया था। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने अमृत भारत योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोटा मंडल के अधिकारी लगातार स्टेशनों का निरीक्षण करने का दावा करते हैं, लेकिन बयाना स्टेशन की स्थिति बताती है कि यह निरीक्षण केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित हैं।
बजट: 25 करोड़ रुपये आवंटित।
काम: मरम्मत के बावजूद शेड से रिसाव।
प्रभाव: यात्री सुविधाओं का अभाव और सरकारी धन की बर्बादी।
मंडल के अन्य स्टेशनों से भी घटिया निर्माण की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
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