कोटा, राजस्थान। हाल ही में एक कर्मचारी की आत्महत्या के बाद चर्चा में आए एक विभाग का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विभाग के कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि यहाँ के सुपरवाइजर कर्मचारियों से 'दारू की बोतल दो, छुट्टी लो' की नीति पर काम करते हैं।
क्या है आरोप?
कर्मचारियों का आरोप है कि सुपरवाइजर उनसे शराब की बोतल की मांग करते हैं और जो कर्मचारी बोतल देता है, उसे मनचाही छुट्टी और आराम मिलता है। जो कर्मचारी शराब नहीं देता, उसे परेशान किया जाता है और तब तक दबाव बनाया जाता है जब तक वह भी शराब देने के लिए मजबूर न हो जाए। इस तरह की हरकतों से विभाग को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
कैसे चलता है यह खेल?
कर्मचारियों के अनुसार, सुपरवाइजर सीधे तौर पर शराब की बोतल नहीं लेते। वे पहले बोतल को एक स्टॉल पर रखवाते हैं और बाद में वहाँ से ले जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब यह काम न होता हो। कई कर्मचारियों ने सुपरवाइजरों को स्टेशन के पास के एक होटल बार में हर रात शराब पीते हुए देखा है। कुछ ने तो ऑफिस में भी शराब पार्टी करते हुए देखा है।
'दारू की बोतल' के नाम से मशहूर सुपरवाइजर
कुछ सुपरवाइजर तो मुफ्त की शराब के इतने आदी हो गए हैं कि वे कर्मचारियों के बीच 'दारू की बोतल' के नाम से जाने जाते हैं। कर्मचारी व्हाट्सएप पर भी एक-दूसरे से पूछते हैं कि आज किसकी ड्यूटी है, तो जवाब में शराब की बोतल की तस्वीर भेज दी जाती है।
पहले भी लगे हैं गंभीर आरोप
इसी कार्यालय के कर्मचारियों ने पहले भी सुपरवाइजरों पर आत्महत्या के लिए उकसाने और परेशान करने के आरोप लगाए थे, जिसके कारण उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया था। यह मामला अब प्रशासन के संज्ञान में है और देखना होगा कि इस पर क्या कार्रवाई होती है।
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