मौत को मात: 130 की रफ्तार से दौड़ती राजधानी एक्सप्रेस के पार्सल डिब्बे पर लटका रहा फौजी

मौत को मात: 130 की रफ्तार से दौड़ती राजधानी एक्सप्रेस के पार्सल डिब्बे पर लटका रहा फौजी

30 किलोमीटर तक हवा से लड़ता रहा जवान; गार्ड की मुस्तैदी से बल्लभगढ़ में बची जान, एक अन्य घटना में ट्रेन के नीचे गिरा फौजी

कोटा/नई दिल्ली। रविवार को निजामुद्दीन-मुंबई अगस्त क्रांति तेजस राजधानी एक्सप्रेस (12954) में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसे देखकर लोगों की सांसें अटक गईं। एक फौजी जवान अपनी ट्रेन छूटने के डर से चलती राजधानी के सबसे पीछे लगे पार्सल यान (LV) के दरवाजे पर लटक गया। करीब 30 किलोमीटर तक वह मौत और जिंदगी के बीच झूलता रहा, जिसे अंततः गार्ड की सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया गया।

🚄 निजामुद्दीन से बल्लभगढ़ तक 'खतरनाक' सफर

जानकारी के अनुसार, फौजी दीपक सुधाकर का रिजर्वेशन इसी ट्रेन के बी-9 कोच में था और उसे मुंबई जाना था। शाम 5:15 बजे जब ट्रेन निजामुद्दीन से रवाना हुई, तो दीपक समय पर कोच तक नहीं पहुंच सका। ट्रेन की रफ्तार बढ़ते देख उसने जल्दबाजी में सबसे पीछे लगे पार्सल डिब्बे का हैंडल पकड़ लिया और उस पर लटक गया।

तुगलकाबाद स्टेशन के पास जब किसी की नजर इस खतरनाक मंजर पर पड़ी, तो तुरंत आरपीएफ को सूचित किया गया। आरपीएफ की सूचना मिलते ही ट्रेन के गार्ड (ट्रेन मैनेजर) दिलीप कुमार ने तुरंत कार्रवाई की और बल्लभगढ़ स्टेशन पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकी। दीपक को सुरक्षित नीचे उतारा गया। गनीमत रही कि राजधानी की तेज रफ्तार और हवा के दबाव के बावजूद जवान की पकड़ नहीं छूटी, वरना बड़ा हादसा निश्चित था।


⚠️ दूसरी घटना: कोटा में प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा फौजी

रेलवे सुरक्षा से जुड़ी एक और गंभीर घटना शनिवार रात कोटा स्टेशन पर हुई। यहाँ एक अन्य फौजी चलती कोटा-मंदसौर ट्रेन (59833) में चढ़ने की कोशिश के दौरान अनियंत्रित होकर प्लेटफॉर्म और पटरी के बीच के गैप में गिर गया।

  • गार्ड ने दिखाई फुर्ती: घटना देखते ही ट्रेन के गार्ड आरसी मीणा ने तुरंत 'प्रेशर ड्रॉप' कर ट्रेन को वहीं खड़ा कर दिया।

  • बाल-बाल बची जान: यात्रियों और रेल कर्मचारियों की मदद से फौजी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गनीमत रही कि उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई।

  • गलत ट्रेन और नशा: चश्मदीदों और रेलवे स्टाफ के अनुसार, फौजी पूरी तरह होश में नहीं लग रहा था। उसे भोपाल जाना था, लेकिन नशे या भ्रम की स्थिति में वह गलत ट्रेन (मंदसौर जाने वाली) में चढ़ने का प्रयास कर रहा था।

📢 रेलवे की अपील

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से बार-बार अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें। जान की कीमत एक सफर या रिजर्वेशन से कहीं ज्यादा कीमती है। दोनों ही मामलों में गार्ड्स की सतर्कता ने दो पिताओं, बेटों और सैनिकों की जान बचा ली।


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