राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में देरी: हाईकोर्ट के नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग देगा जवाब

राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में देरी: हाईकोर्ट के नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग देगा जवाब

जयपुर: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को समय पर न कराने को लेकर मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुँच गया है। 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न न होने पर न्यायालय द्वारा जारी 'अवमानना नोटिस' के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है। आयोग का तर्क है कि चुनाव की तैयारियों में देरी के पीछे मुख्य कारण राज्य सरकार से समय पर जरूरी सूचनाओं और आरक्षण संबंधी विवरण का न मिलना है।


चुनाव प्रक्रिया क्यों अटकी? (मुख्य कारण)

आयोग के अनुसार, चुनाव की घोषणा मार्च के पहले सप्ताह में ही होनी थी, लेकिन निम्नलिखित तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया बाधित हुई:

  • आरक्षण का निर्धारण: 25 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद, राज्य सरकार को SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी थी। बिना इस सूचना के आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं कर सकता।

  • पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल: सरकार ने 31 मार्च को पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया, जिससे आरक्षण प्रक्रिया में और संशय पैदा हुआ।

  • परिसीमन का विवाद: कई नगरीय निकायों में परिसीमन निरस्त होने के बाद आयोग ने बार-बार पूछा कि चुनाव पुराने आधार पर होंगे या नए, लेकिन सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।


आयोग बनाम सरकार: पत्राचार का घटनाक्रम

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी सक्रियता साबित करने के लिए सरकार के साथ हुए पत्राचार का ब्यौरा तैयार किया है:

पंचायती राज चुनाव की स्थिति:

तिथि घटनाक्रम
31 दिसंबर, 2025 परिसीमन कार्य पूर्ण हुआ।
25 फरवरी, 2026 अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
09 मार्च, 2026 आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर आरक्षण सूचना मांगी और अवमानना की चेतावनी दी।
31 मार्च, 2026 सरकार का जवाब आया कि "प्रक्रिया अभी जारी है"।

नगरीय निकाय चुनाव की स्थिति:

आयोग ने स्वायत्त शासन विभाग को 19 दिसंबर 2025 से 3 फरवरी 2026 के बीच कुल 6 पत्र लिखे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अंततः आयोग ने स्वयं निर्णय लेते हुए:

  • 196 निकायों के लिए 20 फरवरी को मतदाता सूची कार्यक्रम जारी किया (अंतिम सूची 22 अप्रैल को आएगी)।

  • शेष 113 निकायों के लिए 24 मार्च को अलग कार्यक्रम जारी किया (अंतिम सूची 8 मई को आएगी)।


अब आगे क्या?

हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करते समय आयोग यह स्पष्ट करेगा कि उसकी ओर से मतदाता सूचियों का काम समय पर पूरा कर लिया गया था, लेकिन सरकार द्वारा आरक्षण की अधिसूचना जारी करने में देरी के कारण 15 अप्रैल की समयसीमा का पालन करना संभव नहीं हो पाया। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं कि क्या वह सरकार को कड़ी फटकार लगाएगा या चुनाव की नई समयसीमा तय करेगा।


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